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Ambedkar Nagar News: अस्पताल से गायब मिले रजिस्टर व सीसीटीवी, सील, भागा संचालक

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शनिवार को बसखारी ​स्थित जय इ्रंद्रा हॉ​स्पिटल को सील करने से पहले जांच करते एसीएमओ। संवाद
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बसखारी (अंबेडकरनगर)। गर्भवती महिला की उपचार के दौरान मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बसखारी के जय इंद्रा हॉस्पिटल को सील कर दिया। डीएम ईशा प्रिया के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम जब अस्पताल पहुंची तो वहां से मरीजों के पंजीकरण रजिस्टर, सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर समेत कई अहम साक्ष्य गायब मिले।
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जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधक मूलचंद मौर्य भी टीम को चकमा देकर भाग गया। जहांगीरगंज क्षेत्र के मठिया महमदपुर निवासी सुमन यादव (30) पत्नी पंकज यादव कुछ माह की गर्भवती थीं। गर्भस्थ शिशु में समस्या होने पर पांच जुलाई को उन्हें गर्भपात के लिए जय इंद्रा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और इलाज के दौरान सात जुलाई को उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद मृतका के भाई संजय यादव ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तहरीर दी थी।
डीएम ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, एसडीएम टांडा संजीव सिंह और डॉ. रजनी सचान की संयुक्त जांच समिति गठित की। शनिवार को टीम ने अस्पताल पहुंचकर निरीक्षण किया, लेकिन वहां कई महत्वपूर्ण अभिलेख और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य गायब मिले। जांच के दौरान मृतका के भाई संजय यादव, पिता तथा आशा बहू अनुराधा यादव के बयान दर्ज किए गए।
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एसीएमओ डॉ. रामानंद सिद्धार्थ ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण मुकेशचंद मौर्य के नाम था, जिसकी वैधता अप्रैल 2026 में ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी था। पूरी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
पहले भी जा चुका है जेल
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल प्रबंधक मूलचंद मौर्य पहले भी प्रसूता की मौत के मामले में जेल जा चुका है। करीब दो वर्ष पहले इसी स्थान से कुछ दूरी पर संचालित उसके अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बावजूद दोबारा अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया गया।
बसखारी में अवैध अस्पतालों का नेटवर्क सवालों के घेरे में
यह घटना बसखारी क्षेत्र में बिना वैध पंजीकरण संचालित निजी अस्पतालों पर फिर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण अवैध अस्पताल, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। पिछले दो वर्षों में ऐसे अस्पतालों में उपचार के दौरान आधा दर्जन से अधिक महिलाओं की मौत हो चुकी है। करीब छह माह पहले भी बसखारी के एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर इंटरमीडिएट पास युवक और सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट के पुत्र द्वारा ऑपरेशन किए जाने का मामला सामने आया था जिसमें प्रसूता की मौत हो गई थी। उस मामले में दो आरोपी जेल भेजे गए थे, जबकि अस्पताल संचालिका अब तक फरार है।
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