आलापुर (अंबेडकरनगर)। स्थानीय तहसील में लाखों रुपए खर्च कर तैयार किया जा रहा रिकार्ड रूम का काम अधर में लटका पड़ा है। इसके चलते पिछले करीब दो वर्ष से खरीद कर लाए गए लोहे के रैक जंग खा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिन फाइलों को सुरक्षित करने की कार्य योजना तैयार की गई थी, वह फाइलें भी इधर-उधर कमरों में धूल फांक रही हैं। ठेकेदार ने अधूरा काम कराकर छोड़ दिया है। काम न पूरा होने के पीछे पैसे की कमी कारण बताया जा रहा है।
करीब दो साल पहले आलापुर तहसील में फाइलों के रख रखाव के लिए रिकार्ड रूम बनाने की कार्य योजना तैयार की गई। इसके लिए ठेकेदार को चयनित किया गया। तहसील के एक बड़े हाल को रिकार्ड रूम बनाने का काम शुरु हुआ। लाखों रुपए खर्च कर लोहे के रैक की खरीद की गई, हालांकि उसे व्यवस्थित करने की जरूरत नहीं महसूस की गई। जिस कमरे को रिकार्ड रूम बनाना था, उसी में बेतरतीब ढंग से लोहे के इन रैक को जंग लगने के लिए छोड़ दिया गया है।
लगभग दो वर्ष का समय बीत गया, लेकिन जिम्मेदार लोग इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। न तो ठेकेदार उन्हें व्यवस्थित करने की जरूरत महसूस कर रहा है, और न ही प्रशासन काम पूरा कराने को लेकर दिलचस्पी दिखा रहा है। सूत्रों से पता चला कि धनाभाव के चलते कार्य अधर में लटका है। ठेकेदार का कहना है कि जितनी रकम मिली थी, उतना काम पूरा हो चुका है। जबकि प्रशासन का कहना है कि उसी रकम में उसे काम को पूरा करना है। ठेकेदार व प्रशासन की इसी खींचतान में रिकार्डरूम का निर्माण अधर में लटका है।
तहसील में रिकार्ड रूम न होने के चलते फाइलें इधर-उधर कमरों में धूल फांक रही हैं। अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष सुनीत द्विवेदी का कहना है कि रिकार्ड रूम बनाने की कार्य योजना अधिवक्ताओं की मांग पर हुई थी। तत्कालीन डीएम से मिलकर अधिवक्ताओं ने यह बात रखी थी। उनके आश्वासन के बाद यह कार्य शुरू हुआ था। परन्तु अब तक यह काम पूरा नहीं हुुआ।
इसका प्रतिकूल असर तहसील के अभिलेखों के रखरखाव पर पड़ रहा है। ऐसे में तहसील प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कल निर्माण कार्य पूरा कराया जाना चाहिए, जिससे फाइलों को सुरक्षित रखा जा सके। उधर एसडीएम भरतलाल सरोज ने बताया कि इस प्रकरण में आवश्यक पत्राचार चल रहा है। जल्द ही अधूरे कार्य को पूरा करा दिया जाएगा।