अंबेडकरनगर। कहने को तो ये तकनीकी भूल है, साहब कह रहे हैं दुरुस्त करा ली जाएगी। इसके बाद सब ठीक हो जाएगा। हालांकि, बात सिर्फ इतनी सी नहीं है। ये भूल जिले के पांच हजार रसोइयों पर भारी पड़ रही है। इन्हें करीब चार महीने से मानदेय नहीं मिला है। अब करीब दो करोड़ रुपये की रकम आई भी तो इसी तकनीकी भूल में फंस गई है। ऐसे में इनके लिए घर चलाना ही मुश्किल हो रहा है। वहीं, भाई-बहन के प्यार के त्योहार रक्षाबंधन की तैयारियां इन पर काफी भारी पड़ रही हैं।
दरअसल, तकनीकी गड़बड़ी के चलते करीब पांच हजार रसोइयों के मानदेय भुगतान के लिए शासन से आई करीब दो करोड़ की रकम ट्रेजरी में फंसी पड़ी है। मानदेय भुगतान न होने से इन्हें रक्षाबंधन फीका पड़ता दिख रहा है। दरअसल, मानदेय भुगतान सीधे रसोइया मजदूरों के खाते में जाता है, लेकिन इस बार ट्रेजरी कार्यालय को भेजे गए पत्र में शासन ने विद्यालयों के खाते में राशि भेजे जाने को कहा है। इसके चलते ही मानदेय भुगतान अधर में लटक गया है। भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके, इसके लिए ट्रेजरी कार्यालय ने शासन को सुधार के लिए पत्र भेजा है।
बीते दिनों अप्रैल से जुलाई तक के मानदेय भुगतान के लिए शासन से ट्रेजरी कार्यालय को दो करोड़ की राशि उपलब्ध हुई तो रसोइयों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। इससे पहले कि मानदेय भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती, तकनीकी गड़बड़ी के चलते भुगतान रोक दिया गया। बीएसए कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शासन ने ट्रेजरी कार्यालय को मानदेय भुगतान के लिए राशि भेजने के साथ ही भुगतान संबंधी जो पत्र भेजा, उसमें कहा कि रसोइयों की संख्या के आधार पर राशि विद्यालयों के खाते में भेज दी जाए।
दरअसल, पूर्व में तय नए नियम के अनुसार मानदेय भुगतान विद्यालय के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे रसोइयों के खाते में होता है। इस बीच राशि के साथ प्राप्त निर्देश में कहा गया कि इस राशि को विद्यालय में भेजा जाए। विरोधाभास की स्थिति होने पर प्रक्रिया रोक देनी पड़ी। समय पर मानदेय भुगतान न होने से जिले के 2 हजार 49 विद्यालयों में कार्य कर रहे करीब 5060 रसोइयों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में रक्षाबंधन का त्योहार मनाना इनके लिए भारी पड़ रहा है।
रसोइया रामकुमारी व फिरता देवी ने कहा कि मानदेय आने से खुशी हुई थी कि रक्षाबंधन उल्लास के साथ मना सकेंगे। भुगतान प्रक्रिया में रुकावट आने से मायूसी है। राजमणि व संतराम ने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे रसोइयों की समस्याओं को देखते हुए जल्द भुगतान किया जाए। समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो रक्षाबंधन की खुशियां बेकार चली जाएंगी।
भुगतान के लिए शासन से जो पत्र मिला है, उसमें कहा गया है कि विद्यालय के खाते में राशि भेजी जाए, जबकि भुगतान अब रसोइयों के खाते में होता है। तकनीकी गड़बड़ी के चलते ही भुगतान नहीं हो सका है। इसमें सुधार के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
- सत्यप्रकाश मौर्य, प्रभारी, एमडीएम, बेसिक शिक्षा