टांडा के बहुचर्चित राममोहन हत्याकांड में सीजेएम ने विवेचक को 18 मई को केस डायरी के साथ तलब किया है। परिवारीजनों की शिकायत पर पूर्व में तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक समेत तीन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध शव से दुर्व्यवहार आदि आरोपों को लेकर न्यायालय के निर्देश पर अलीगंज थाने में केस दर्ज हुआ था।
गौरतलब है कि 4 दिसंबर 2013 को टांडा के अलीगंज थाना क्षेत्र निवासी व्यवसायी राममोहन गुप्त की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे कुछ दिन पहले ही उनके चाचा हिंदू युवा वाहिनी के जिला संयोजक रहे रामबाबू गुप्त की भी हत्या हुई थी। राममोहन की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश भड़क उठा था।
शव रखकर जाम लगाने के दौरान पुलिस से जमकर झड़प हुई थी। परिवारीजनों का आरोप था कि तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक राजीव मल्होत्रा, सीओ टांडा नरेंद्र सिंह व एसओ रमेशचंद्र पांडेय ने शव को घसीटकर गाड़ी में रखवाया था और उसका अपमान किया था।
इसी मामले में न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने तीनों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध केस दर्ज किया था। हालांकि बाद में विवेचना के दौरान फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। सीजेएम न्यायालय ने पुलिस की यह अंतिम रिपोर्ट निरस्त करते हुए 11 सितंबर 2015 को फिर से विवेचना का निर्देश दिया।
यह भी कहा गया कि विवेचना कर रिपोर्ट एक माह के भीतर पेश की जाए। हालांकि लंबा समय बीतने के बाद भी विवेचना पूरी कर कोर्ट को नहीं दी जा सकी। इसी मामले में अब न्यायालय में पुलिस की शिकायत किए जाने के बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
सीजेएम राजेश नरायन मणि त्रिपाठी ने अलीगंज थाने के विवेचक को 18 मई को केस डायरी के साथ तलब किया है।