जिले में रेल लाइन विद्युतीकरण का कार्य ठप पड़ गया है। रेल लाइन दोहरीकरण की राह देख रहे यात्रियों को विद्युतीकरण होने से रेल यात्रा में सुविधा की उम्मीद जल्द मिलना शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन कार्य बंद होने से इन उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।
लगभग 36 करोड़ रुपये के इस कार्य में सुस्त रफ्तार के कारण रेलवे ने कार्यदायी संस्था को टर्मिनेट कर दिया। इस बीच मार्च 2016 तक जो काम पूरा होना था, अभी तक उसके लिए नई कार्यदायी संस्था का चयन नहीं हो पाया हैै।
नतीजा यह कि यात्रियों को अभी इस रेल रूट पर बिजली से दौड़ती ट्रेनों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। अकबरपुर से होते हुए जो रेल लाइन लखनऊ व वाराणसी की तरफ जाती है, उसके दोहरीकरण होने की मांग दशकों से चली आ रही है।
दरअसल ऐसा न हो पाने से इस रूट से होकर तमाम प्रमुख ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। क्रॉसिंग में लगने वाले समय से यात्रियों को दोहरी मुसीबत अलग से होती है। इन सबके बीच लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व जिले के रेल यात्रियों को एक महत्वपूर्ण सौगात तब मिली, जब केंद्र सरकार ने रेल लाइन का विद्युतीकरण कराए जाने की घोषणा कर दी।
यह विद्युतीकरण वाराणसी के निकट जफराबाद से लेकर जिले के मालीपुर, जाफरगंज व अकबरपुर स्टेशन होते हुए टांडा एनटीपीसी तक होना तय किया गया। रेल लाइन दोहरीकरण की उम्मीद लगाए यात्रियों ने इस निर्णय का भी बढ़ चढ़कर स्वागत किया। आननफानन में रेलवे ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना शुरू कर दिया।
कार्य को तेजी से अमलीजामा पहनाने के लिए रेलवे ने जैबडार नामक कंपनी को अधिकृत किया। कंपनी के अधिकारियों ने गत मई माह में यहां पहुंचकर मालीपुर स्टेशन के निकट पूरे तामझाम से भूमि पूजन कर कार्य की शुरुआत की। बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य के लिए सामग्रियां भी स्टेशन के निकट पहुंचने लगीं।
यात्रियों व स्थानीय लोगों को लगा कि शायद कार्य तेजी से होगा और जल्द ही वे सब बिजली से दौड़ती ट्रेनों के गवाह बन सकेंगे। हालांकि कुछ समय बाद से ही उनकी उम्मीदों को झटका लगना शुरू हो गया, जब कार्य शिथिलता का शिकार हो गया। चंद काम होने के बाद रेलवे ने इसकी मानीटरिंग शुरू की तो पाया कि कार्यदायी संस्था द्वारा रुचि नहीं ली जा रही।
गुणवत्ता की भी शिकायतें सामने आई थीं। इस पर रेलवे ने उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद संबंधित कार्यदायी संस्था को बर्खास्त कर दिया और तय किया कि अब नई कार्यदायी संस्था का चयन कर उससे काम कराया जाएगा। नतीजा यह कि मौजूदा समय में रेल लाइन विद्युतीकरण का कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है।