लगभग दो घंटे तक चले अभियान के बाद भी अजय सिपाही व उसके गुर्गे पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके। बीते कुछ दिनों से गांव में रहने की खबर दरअसल सामने आ रही थी। इससे पूर्व यहां तैनात रहे एसओ राजदेव मिश्र को निलंबित कर उनके स्थान पर शनिवार को ही विजय मिश्र को महरुआ की कमान सौंपी गई।
मालूम हो कि माफिया अजय सिंह सिपाही के इशारे पर ही उसके गुर्गों ने बीते दिनों टांडा रायबरेली एनएच मार्ग निर्माण में लगे अधिकारियों से रंगदारी मांगी थी। इसे लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों को रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। इससे कुछ दिनों तक निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ था।
पुलिस ने बाद में मामले में अजय सिपाही को नामजद करते हुए केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। एक मामले में जमानत उठवाकर वह जेल गया था, लेकिन बीते दिनों ही वह जमानत पर बाहर आया था। इस बीच एनएच निर्माण के मामले में पुलिस को अजय सिपाही की तलाश थी। कुछ दिनों से ऐसी खबर आ रही थी कि अजय सिपाही गांव में ही मौजूद है। इसके बाद भी स्थानीय पुलिस उस पर हाथ डालने से कतरा रही थी।
इसी बीच शनिवार को नए एसओ के रूप में विजय कुमार मिश्र को महरुआ थाने की कमान सौंपी गई। नवागत एसओ के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शनिवार को ही अजय के गांव लोकनाथपुर पहुंचकर ताबड़तोड़ छापेमारी की। तलाशी अभियान के दौरान अजय सिपाही नहीं मिला। उसके गुर्गे भी नहीं दिखे।
इससे पहले शनिवार पूर्वाह्न महरुआ के एसओ राजदेव मिश्र को एसपी ने निलंबित कर दिया। दरअसल भूमि विवाद के एक मामले में पुलिस महानिदेशक कार्यालय में हुई शिकायत के बाद वहां से सीधे जांच कराई गई थी। इसमें थानाध्यक्ष की भूमिका अनुचित पाई गई। इस पर पुलिस महानिदेशक ने राजदेव मिश्र को निलंबित करने का निर्देश दिया था।