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रोचकता के साथ ऐतिहासिकता समेटे है जिले में रामलीला का मंचन

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अंबेडकरनगर। जिले में विजयदशमी पर्व भी काफी रोचकता व एतिहासिकता समेटे हुए है। बसखारी में जहां रामलीला की शुरुआत 108 वर्ष पहले हुई थी, वहीं जलालपुर में 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन श्रीराम रावण युद्ध के बाद होता है। खास बात यह कि ऐसी कई रामलीला समितियां हैं, जिसमें हिंदुओं के अलावा मुस्लिम वर्ग के लोग भी प्रमुखता से भागीदारी करते हैं।
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दशहरा पर्व बुधवार को पूरे जिले में उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। खास बात यह कि जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां की रामलीला का अपना एक खास मुकाम बन चुका है। कहीं पर 108 वर्ष पहले अंग्रेज अधिकारी ने रामलीला का शुभारंभ किया तो कहीं पर 30 से 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन उल्लास के साथ किया जाता है।
विद्युतनगर प्रतिनिधि के अनुसार, टांडा के एनटीपीसी परिसर में रामलीला की शुरुआत करीब 34 वर्ष पहले 1985 में हुई थी। समिति अध्यक्ष आरके गर्ग ने बताया कि आवासीय परिसर के रामलीला मैदान में भव्य मेले का आयोजन करने के साथ 22 फीट के रावण के पुतले का दहन होगा। बसखारी प्रतिनिधि के अनुसार, किछौछा में रामलीला की शुरुआत 108 वर्ष पहले हुई थी। वर्ष 1911 में रामलीला का शुभारंभ फैजाबाद से आए एक अंग्रेज अधिकारी ने किया था। तब से यहां लगातार रामलीला का आयोजन उल्लास व श्रद्धा के साथ होता चला आ रहा है। 30 फीट लंबे रावण के पुतले का दहन इस बार यहां करने की तैयारी है।
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केदारनगर प्रतिनिधि के अनुसार, इल्तिफातगंज में करीब 60 वर्ष पहले रामलीला की शुरुआत रामविलास ने की थी। समिति अध्यक्ष अजय मोदी ने बताया कि आठ दिन की रामलीला के बाद 20 फीट से बड़े रावण के पुतले का दहन किया जाता है। जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार, धर्मशाला में होने वाली रामलीला का शुभारंभ वर्ष 1918 में हुआ था, जबकि सब्जी मंडी में होने वाले रामलीला का शुभारंभ 1972 में हुआ। धर्मशाला में होने वाली रामलीला समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सोनी ने बताया कि 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन श्रीराम-रावण युद्ध के बाद होगा।
आलापुर प्रतिनिधि के अनुसार, इंदईपुर में रामलीला की शुरुआत 1947 में रामखेलावन मद्धेशिया, मोहम्मद यासीन, रामनयन विश्वकर्मा व मोहम्मद केरात खान आदि ने मिलकर की थी। यह परंपरा तब से लगातार चली आ रही है। यहां 21 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किए जाने की तैयारी है। हजपुरा प्रतिनिधि के अनुसार बाजार में वर्ष 1980 में रामलीला की शुरुआत तत्कालीन ग्राम प्रधान नवाब हुसैन ने किया था। यहां लगभग 25 फीट ऊंची प्रतिमा का दहन होता है। महरुआ प्रतिनिधि के अनुसार सिलावट में रामलीला का शुभारंभ 1981 में हुआ। प्रबंधक विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि लगभग 15 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन यहां होगा।
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