जलालपुर (अंबेडकरनगर)। पूर्वांचल की आस्था और परंपरा का प्रतीक बाबा गोविंद साहब मेला 29 नवंबर से प्रारंभ हो रहा है। इसके लिए तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। सवा महीने तक चलने वाले इस मेले में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान, पूजा-पाठ और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले के प्रमुख स्नान गोविंद दशमी और पूर्णिमा पर गाजीपुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, बस्ती, गोरखपुर, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, जौनपुर और वाराणसी सहित विभिन्न जिलों से श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु बाबा गोविंद साहब के समाधि स्थल पर खिचड़ी की एक पोटली चढ़ाते हैं और उसका कुछ अंश अपने घर ले जाकर अन्न में मिला देते हैं। कहा जाता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। बाहर से आने वाले श्रद्धालु एक दिन पूर्व खिचड़ी का भोग लगाकर मध्यरात्रि में पवित्र स्नान करते हैं और सुबह समाधि स्थल पर पूजा अर्चना कर लाल गन्ना और खजला प्रसाद स्वरूप घर ले जाते हैं। गोविंद साहब मठ के महंत बाबा भगेलु दास ने बताया कि मठ पर चढ़ाई जाने वाली खिचड़ी अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसके सेवन से मन और मस्तिष्क दोनों को शांति मिलती है तथा घर की उन्नति होती है।
ये है मेले का महत्व
संत गोविंद साहब का जन्म लगभग 400 साल पहले अंबेडकरनगर के जलालपुर में हुआ था। उन्होंने गाजीपुर जिले के भुरकुरा आश्रम में महंत भीखा साहब से दीक्षा ली थी। संत गोविंद साहब ने संवत 1726 (ईस्वी) में अगहन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को समाधि ली थी। इसी तिथि से हर साल मेला लगना शुरू हुआ। यह मेला जात-पात और छुआछूत के भेदभाव को खत्म करने का प्रतीक है।
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होगी मेला कोतवाली की स्थापना
मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस की ओर से मेला कोतवाली स्थापित की जाती है। एक वॉच टॉवर पर 24 घंटे पुलिसकर्मी निगरानी करते हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सरोवर पर बैरियर, नाव और गोताखोरों की तैनाती रहती है। वहीं, 500 से अधिक सीसी कैमरों से पूरे मेले की निगरानी की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 24 घंटे चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
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दूर-दराज से आते हैं व्यापारी
गोविंद दशमी और पूर्णिमा स्नान के अवसर पर स्थानीय बाजारों में भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे बाहर से आए व्यापारियों को भी विशेष लाभ होता है। बड़ी तादात में दूर-दराज से व्यापारी यहां पहुंचकर दुकानें लगाते हैं। व्यापारियों को जगह मुहैया कराने के लिए इस पर सिंगल विंडो की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी प्रकार की समस्या न आए।
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सजेगा पशु बाजार
किसानों के लिए उत्तम नस्ल की भैंस, बकरी और घोड़ों की बाजार लगेगी। इसमें हजारों की तादात में पशु और व्यापारी आते हैं। कृषि उपकरणों के लिए भी दुकानें सजती हैं, जिन पर काफी खरीदारी होती है।