अब तक की सबसे अधिक ठंड पड़ने से गुरुवार को आम जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त होकर रह गया। आसमान में छाए बादल व सर्द हवा से हुई कड़ाके की ठंड के चलते जगह-जगह लोग निजी अलाव की व्यवस्था कर ठंड से बचने का प्रयास करते दिखे। मौसम खराब होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर लोग बाजारों का रुख नहीं कर सके। इससे जिला मुख्यालय के बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।
उधर, कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रशासन की तरफ से न तो सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जा सकी है और न ही आर्थिक रूप से कमजोर लोगों में कंबल का ही वितरण किया जा सका है। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर रैन बसेरे की भी स्थापना नहीं की जा सकी है। उधर, कोहरे के चलते ट्रेनों की रफ्तार पर भी अंकुश लग गया है। इससे ज्यादातर ट्रेनें तीन से 14 घंटे तक विलंब से चलीं।
नतीजतन ट्रेनों के इंतजार में यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने के चलते गंतव्य तक जाने वाले यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दरअसल नोटिस बोर्ड पर कई ट्रेनों के विलंब होने का समय बढ़ता जा रहा है। इससे ट्रेन के निर्धारित समय पर रेलवे स्टेशन पहुंचने यात्रियों को कड़ाके की ठंड में इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा।
मऊ जाने वाले यात्री राहुल व सूर्यभान ने कहा कि सूचना पट पर ट्रेनों की सटीक जानकारी नहीं दी जा रही है। वाराणसी जाने के लिए स्टेशन पहुंचे अंगद व अभिषेक ने कहा कि यदि ट्रेनों की सही जानकारी दी जाए तो अधिक समस्या न हो। न तो नोटिस बोर्ड पर ट्रेनों की स्थिति की सही जानकारी दी जाती है और न ही पूछताछ केंद्र पर।
बजट होने के बाद भी प्रशासन की तरफ से सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। बताते चलें कि लगभग एक पखवारा पूर्व ही शासन से जिले को प्रत्येक तहसील के लिए अलाव की व्यवस्था करने को 50-50 हजार रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके बाद भी किसी भी तहसील में सार्वजनिक स्थलों पर अलाव नहीं जलाए जा सके।
नतीजतन कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोगों को निजी अलाव की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गुरुवार को भी जिला मुख्यालय पर कड़ाके की ठंड से बचने के लिए फैजाबाद रोड, मीरानपुर, पुराने तहसील तिराहा, शहजादपुर चौक, लोहामंडी, सब्जी मंडी, मालीपुर चौराहा, दोस्तपुर चौराहा व बस स्टेशन क्षेत्र समेत अन्य क्षेत्रों में आमजन ने निजी अलाव की व्यवस्था कर ठंड से बचने का प्रयास किया।
यही हाल जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का भी रहा। लगातार गिरते तापमान के बावजूद जिला मुख्यालय पर रैन बसेरे की स्थापना भी नहीं हो सकी। बताते चलें कि जिला मुख्यालय पर बीएन इंटर कॉलेज के सामने, अकबरपुर रेलवे स्टेशन के निकट व नई सड़क पर रैन बसेरे की स्थापना की जाती है। अब तक इन स्थानों पर रैन बसेरे की स्थापना नहीं हो सकी है।
नतीजतन रात्रि में यात्रा करने वालों के साथ-साथ रिक्शा चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को अब तक की सबसे अधिक ठंड को देखते हुए रिक्शा चालक रग्घू ने कहा कि रैन बसेरे की स्थापना न होने एवं अलाव की व्यवस्था न होने से रात्रि में बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। प्रशासन को इस तरफ ठोस कदम उठाने चाहिए। कोहरे व कड़ाके की ठंड ने ट्रेनों की रफ्तार पर भी अंकुश लगा दिया है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को सुबह छह बजकर 45 मिनट पर आने वाले कैफियात डाउन एक्सप्रेस सात घंटा विलंब से अकबरपुर पहुंची। इसके अलावा कैफियात अप एक्सप्रेस बुधवार शाम निर्धारित समय छह बजकर 47 मिनट से तीन घंटा विलंब से पहुंची।
बुधवार को किसान डाउन एक्सप्रेस निर्धारित समय शाम चार बजकर 36 मिनट से साढ़े चार घंटा विलंब से आई, पैसेंजर डाउन निर्धारित समय शाम चार बजे से साढ़े छह घंटा लेट अकबरपुर पहुंची। फरक्का डाउन एक्सप्रेस गुरुवार पूर्वाह्न निर्धारित समय 11 बजे से नौ घंटा विलंब से आई। फरक्का अप बुधवार को निर्धारित समय दो बजकर 13 मिनट से 14 घंटा विलंब से अकबरपुर पहुंची। गुरुवार को देहरादून अप एक्सप्रेस निर्धारित समय दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से पांच घंटा विलंब से आई। दून डाउन एक्सप्रेस गुरुवार अपराह्न एक बजकर 10 मिनट से तीन घंटा विलंब से पहुंची।