संजीव द्विवेदी
अंबेडकरनगर। परिषदीय विद्यालयों में अब पढ़ाई की पुरानी पद्धति का परिषदीय विद्यालयों में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत कक्षा चार व पांच और छह से आठ के विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा।
इसका उद्देश्य जिज्ञासा, अनुभवात्मक अधिगम, समाधान, कौशल का विकास, आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण कौशल को बढ़ावा देना है। यह प्रत्येक शनिवार को विज्ञान विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के मार्गदर्शन में किया जाएगा।
इसके लिए जिले के 19 पीएमश्री व दो उच्च प्राथमिक विद्यालय कौडही रामनगर व भिदूड़ बसखारी को चिह्नित किया गया है। इसके लिए बजट भी जारी कर दिया है। इसका बजट 42 हजार रुपये जारी किया गया है। प्रति विद्यालय 20 हजार रुपये भेजे गए हैं। इसमें विकसित भारत बिल्डथॉन के लिए 2500 रुपये, प्रोजेक्ट कार्य के लिए 15 हजार रुपये और मासिक पत्रिका का खरीदने के लिए 2500 रुपये दिए गए हैं। अधिकांश विद्यालयों में अभी भी रटने-रटाने और ब्लैक बोर्ड के जरिए पढ़ाने का चलन बरकरार है। अब पढ़ाई केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चे प्रोजेक्ट और मॉडल बनाकर सीखेंगे। इस बदलाव से छात्रों को विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन विषयों को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझने में मदद मिलेगी। जिला समन्वयक डॉ. सुरेश कुमार तिवारी ने बताया कि जिले से पांच शिक्षकों को कानपुर आईआईटी में प्रशिक्षण लेने के लिए भेजा गया था, जो डाॅयट प्रवक्ता के साथ मिलकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।