तापमान बढ़ने के साथ ही जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। जिला मुख्यालय पर 20 घंटे रोस्टर के बजाय सिर्फ 13 घंटे बिजली मिल पा रही है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटे के रोस्टर के सापेक्ष आठ घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। अघोषित विद्युत कटौती से उपभोक्ताओं में त्राहि-त्राहि मची हुई है।
रोस्टर की बात दूर, जो बिजली मिल भी रही है, उसमें लो-वोल्टेज व बार-बार की ट्रिपिंग के चलते उसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक समस्या रात में होने वाली अनियमित कटौती से हो रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सुचारु बिजली उपलब्ध कराने को लेकर शासन व पावर कारपोरेशन के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही विद्युत आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। जर्जर हो चुके विद्युत उपकरणों व ओवरलोडेड चल रहे विद्युत ट्रांसफार्मरों का खामियाजा अब विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। दिन-प्रतिदिन बढ़ते तापमान के चलते बिजली की खपत जिले में अधिक हो रही है।
खपत के सापेक्ष बिजली न मिलने व जर्जर हो चुके विद्युत उपकरणों के आए दिन जवाब देने के चलते रोस्टर के अनुसार बिजली मिलना तो दूर, जो बिजली उपभोक्ताओं को नसीब भी हो रही है, उसका भी समुचित लाभ उनको नहीं मिल पा रहा है।
वैसे तो शहरी क्षेत्रों को 18 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों को 14 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का रोस्टर है लेकिन पखवारे भर से शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बमुश्किल 13 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बमुश्किल 8 घंटा ही बिजली मिल रही है। इसमें भी लो-वोल्टेज के साथ-साथ बार-बार की ट्रिपिंग होती रहती है।
इसके चलते इसका सुचारु लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। दिन के समय होने वाली बिजली कटौती का सामना तो उपभोक्ता किसी प्रकार कर ले रहे हैं, लेकिन रात में होने वाली अघोषित कटौती ने उपभोक्ताओं के समक्ष मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रात आठ बजे से दूसरे दिन सुबह आठ बजे के बीच जिला मुख्यालय पर ही लगभग पांच घंटे की कटौती होती है। इससे पूरी रात उपभोक्ता भीषण गर्मी में जागते हुए पावर कारपोरेशन अधिकारियों को कोसते रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति की दशा तो और भी बदतर है।
यहां कब बिजली आती है और कब चली जाती है, इसका कोई समय ही निर्धारित नहीं रह गया है। जिला मुख्यालय पर सायंकालीन कटौती का कोई समय ही निर्धारित नहीं रह गया है। कभी शाम पांच बजे बिजली गुल हो जाती है तो कभी आठ बजे। कितनी देर के लिए कटौती की गई है, इसका जवाब पावर कारपोरेशन अधिकारियों के पास नहीं रहता।
इतना ही नहीं, रात में भी कोई समय निर्धारित नहीं रह गया है। दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही विद्युत आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं में पावर कारपोरेशन अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्याप्त होती जा रही है।
अकबरपुर के रेहान जैदी, वकार हुसैन, दीपकुमार, अनुराग श्रीवास्तव, गोपाल तिवारी, अभिषेक सिंह, मुन्ना चौरसिया व अजय बजाज ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सुचारु बिजली उपलब्ध कराने को लेकर पावर कारपोरेशन दावे तो बढ़-चढ़कर करता है लेकिन उसे जमीनी हकीकत देने के लिए किसी प्रकार का ठोस कदम नहीं उठा रहा।
चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही विद्युत आपूर्ति में सुधार न किया गया तो वे सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।