जलालपुर। क्षेत्र के उद्धवपट्टी मद्धुपुर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शनिवार को भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया।
प्रवाचक विद्यांशु महाराज ने कहा कि कृष्ण की लीलाएं केवल धार्मिक प्रसंग नहीं हैं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था को संतुलित रखने का माध्यम भी हैं। अत्याचार, अन्याय और असंतुलन के समय कृष्ण ने अपनी लीलाओं के माध्यम से व्यवस्था को पुनः स्थापित किया। अन्याय और अत्याचार का विरोध करना कर्तव्य है। शक्ति का प्रयोग समाज की रक्षा के लिए होना चाहिए। सृष्टि संतुलन और नियमों पर आधारित है। धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं, आचरण भी है। नेतृत्व का आधार न्याय और जिम्मेदारी है। सामाजिक समरसता से ही व्यवस्था मजबूत होती है। कृष्ण के बाल्यकाल से जुड़ी घटनाओं और उनके सामाजिक प्रभावों के बारे में बताया गया। भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में विभिन्न रूपों में अत्याचार का विरोध किया। इन प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।