अंबेडकरनगर। जिले में लगातार हो रही बिजली कटौती और फाॅल्ट ने कुटीर उद्योगों, विशेषकर पावरलूम क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस गंभीर समस्या के चलते पावरलूम संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं हजारों मजदूर भी रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं।
जिले के अकबरपुर, टांडा और जलालपुर क्षेत्रों में संचालित 1.50 लाख से अधिक पावरलूम इकाइयों पर इसका सीधा असर दिख रहा है। पावरलूम उद्योग जिले की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इन इकाइयों में करीब पांच हजार मजदूर प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं। हालांकि, इन दिनों लगातार बिजली कटौती और बार-बार होने वाले फाॅल्ट के कारण पावरलूम दिन भर संचालित नहीं हो पा रहे हैं। रात के समय भी बिजली की ट्रिपिंग और फाॅल्ट की समस्या बनी रहती है, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप पड़ जाता है।
बिजली की अनिश्चितता के कारण पावरलूम संचालकों को बिना काम किए ही मजदूरों को मजदूरी देनी पड़ रही है। यह उनके लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है। वहीं, काम न होने के कारण बड़ी संख्या में मजदूरों को बिना मजदूरी के ही घर लौटना पड़ रहा है। बुनकर नेता इफ्तिखार अंसारी ने बताया कि इन दिनों बिजली कटौती अधिक हो रही है। इसके चलते लूम संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन को बिजली सुधार पर काम करना होगा।
पावरलूम उद्योग में मजदूरी और अन्य खर्चे काफी हद तक निश्चित होते हैं। जब बिजली ही उपलब्ध नहीं होगी तो उत्पादन कैसे संभव है? एक पावरलूम पर प्रतिदिन लगभग 400 रुपये का निर्धारित खर्च कहां से पूरा किया जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है। लगातार बिजली कटौती के कारण उत्पादन रुक जाता है, जिससे संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अब्दुल अलीम,बुनकर, मीरानपुरा टांडा
बार-बार बिजली कटौती से पावरलूम उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है। पावरलूम पर काम करने वाले कारीगर दूर-दराज के इलाकों से आते हैं। जब अचानक बिजली चली जाती है, तो काम पूरी तरह ठप हो जाता है और कारीगरों को अपने घर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बिजली आने के बाद उन्हें दोबारा बुलाने और काम शुरू कराने में काफी समय लग जाता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है और आर्थिक नुकसान बढ़ता है।
महताब आलम- बुनकर, मुमताजगंज