आलू किसानों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें आलू बिक्री करने के लिए मंडियों का चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। गेहूं, धान व गन्ना क्रय केंद्र की तरह ही अब जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आलू क्रय केंद्र की स्थापना की जाएगी।
विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बीच किसानों को उनकी उपज का समुचित मूल्य दिलाने के लिए इस बार आलू का समर्थन मूल्य 487 रुपये निर्धारित कर दिया है। ऐसे में किसानों को औने पौने पर आढ़तियों के हाथों उपज नहीं बेचनी होगी। किसानों के हित को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से जिले के उन 50 हजार किसानों को लाभ मिलेगा, जिन्होंने 1400 हेक्टेअर क्षेत्रफल में आलू की बुआई की है।
बताते चलें कि जिले में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। अब तक आलू की उपज बेचने के लिए किसानों के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं थी। उन्हें उपज की बिक्री के लिए मंडियों का चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता था।
ऐसे में उन्हें कभी कभी उपज का समुचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था। आलू की अधिक उपज होने पर उन्हें औने पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने अब किसानों के हित को देखते हुए गन्ना, धान व गेहूं क्रय केंद्र की तरह आलू क्रय केंद्र खोले जाने का निर्णय लिया है।
साथ ही किसानों को उपज का समुचित मूल्य मिल सके, इसके लिए समर्थन मूल्य 487 रुपये निर्धारित किया है। अब तक आलू का कोई समर्थन मूल्य नहीं था। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से जिले के 1400 हेक्टेअर क्षेत्र में लगभग 4 लाख 20 हजार क्विंटल आलू की पैदावार करने वाले 50 हजार किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसानों ने कहा कि आलू खरीद के लिए क्रय केन्द्र खोले जाने का यह निर्णय निश्चित तौर पर किसानों के लिए राहत भरा होगा।