अंबेडकरनगर। जिले के इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र में पुलिस कर्मियों द्वारा पैसे लेकर पशुओं का वध कराने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पैसे की बंदरबांट को लेकर आपसी खींचतान ने ही पुलिस की इस करतूत को उजागर कर दिया। एक सिपाही की वसूली को बेनकाब करने के लिए साथी सिपाहियों द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। एसपी आलोक प्रियदर्शी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया। उधर, पुलिस कर्मियों द्वारा पैसे लेकर पशुवध कराने के मामले में थाना प्रभारी पर बड़ी कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने की है। कहा गया कि थाना प्रभारी का यदि नियंत्रण नहीं है तो भी हटाया जाए और यदि मिलीभगत है तो निलंबित किया जाए।
एक तरफ राज्य सरकार प्रतिबंधित पशुओं के वध पर सख्ती से रोक लगा रही है तो दूसरी तरफ पुलिस कर्मी ही तस्करों से पैसे लेकर अवैध कारोबार में लिप्त हैं। पुलिस कर्मियों की इन्हीं करतूत का एक वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें वध प्रतिबंधित पशुओं की बिक्री को लेकर पुलिस कर्मियों की आपसी खींचतान उजागर हुई। जो वीडियो वायरल हुआ उसमें बाइक से पशु मांस ले जा रहे व्यक्ति ने अपना परिचय टांडा के औरंगाबाद निवासी शाकिब के तौर पर दिया।
उसने बताया कि वह टांडा से पशु मांस लाकर इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र में बिक्री करता है। वीडियो में उसने इब्राहिमपुर थाने के सिपाही सचिन सिंह का जिक्र करते हुए बताया कि बिक्री के एवज में उसे पैसा देना पड़ता है। वीडियो थाने के ही एक सिपाही ने बनाया, जिसकी आवाज बाद में अन्य पुलिस कर्मियों ने भी पहचानी। दरअसल सचिन अकेले ही पशु मांस बिक्री कराने के एवज में पैसे ले रहा था, जिसे वह अन्य पुलिस कर्मियों को नहीं देता था। इसी के चलते साथी पुलिस कर्मियों ने मांस विक्रेता का वीडियो बना लिया। यही वीडियो सोशल मीडिया पर वॉयरल हो गया।
एसपी आलोक प्रियदर्शी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले में अलग अलग भूमिका पाए जाने के कारण सिपाही सचिन सिंह, गौरव यादव, हरिप्रकाश यादव व पवन चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। उधर सिपाहियों को लाइन हाजिर किए जाने की खबर सामने आने के साथ ही थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में जिस तरह से पुलिस कर्मियों द्वारा पैसे लेकर पशु मांस की बिक्री कराई जा रही थी। ऐसे में निश्चित तौर पर थाना प्रभारी की लापरवाही या मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। नागरिकों के अनुसार दोनों में से जो भी स्थिति हो, उसे तय करते हुए थाना प्रभारी भी कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस कर्मियों द्वारा पैसा लेकर प्रतिबंधित पशु मांस की बिक्री कराना राज्य सरकार की मंशा और पद की गरिमा व कानून के साथ खिलवाड़ भी है।
सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ है, उसके अनुसार कुल सात व्यापारी टांडा से पशु मांस लेकर इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र में आते थे। यह सभी व्यापारी बाइक की डिग्गी के अलावा बड़े झोले में भरकर वध प्रतिबंधित पशु मांस का कारोबार करते थे। वीडियो में दिए बयान में शाकिब ने कहा कि सात लोग टांडा से पशुमांस लेकर इस क्षेत्र में बिक्री करने आते हैं। प्रत्येक व्यक्ति आठ सौ रुपये प्रत्येक सप्ताह सिपाही सचिन सिंह को देता है। पिछले तीन सप्ताह से वे सब सचिन को पैसा देते आ रहे थे। उसने बताया कि पैसा देने का काम सभी सात व्यक्तियों द्वारा मंगलवार को किया जाता था।
मामले में विधिवत जांच कराई जा रही है। चार सिपाहियों को तात्कालिक तौर पर लाइन हाजिर किया गया है। जांच में जो अन्य तथ्य सामने आएंगे, उन्हें देखते हुए आगे निर्णय होगा।
- आलोक प्रियदर्शी, एसपी