तेज आवाज व प्रदूषण वाले पटाखों पर रोक न लगाने के चलते वातावरण पर इसका असर इस दीप पर्व भी साफ दिखाई पड़ा है। न तो निर्धारित 120 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले पटाखों को रोकने की तरफ ध्यान दिया गया और न ही प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की बिक्री रोकने का इंतजाम हुआ। नतीजा यह कि पहले से ही बेपटरी चल रहे पर्यावरण पर इसका असर देखने को मिला हैै।
पहले से ही प्रदूषण के मामले में स्थितियां नियंत्रण में नहीं हैं। कारण यह कि न तो सार्वजनिक स्थलों की समुचित साफ सफाई हो पा रही है और न ही प्रदूषण रोकने को लेकर कोई ध्यान है। गंदगी जहां तहां अभी भी बिखरी दिखाई देती है, जबकि पूरे देश में बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान चल रहा है।
जिम्मेदार लोगों द्वारा इस तरफ ध्यान न दिए जाने का नतीजा है कि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में समुचित प्रगति नहीं हो पा रही। रही सही कसर दीप पर्व ने पूरी कर दी। तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी जिले में तेज आवाज व प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर रोक लगाने की गंभीरता नहीं दिखाई गई। नतीजा यह रहा कि लोगों ने 120 डेसिबल मानक से भी अधिक आवाज करने वाले व प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की जमकर खरीददारी की।
इस प्रकार के पटाखों की जमकर हुई आतिशबाजी का नतीजा रहा कि एक तरफ जहां ध्वनि प्रदूषण फैला, वहीं वायु प्रदूषण में भी वृद्धि हुई। अकबरपुर व टांडा तहसील में सबसे अधिक प्रदूषण रहा, जबकि भीटी तहसील में कुछ हद तक लोगों ने इस पर नियंत्रण रखा। इसके अलावा जलालपुर में भी तेज आवाज व अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों का प्रयोग लोगों ने बढ़ चढ़कर किया। नतीजा यह रहा कि पर्यावरण पर जमकर हुई आतिशबाजी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।