आलापुर (अंबेडकरनगर)। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाला पितृपक्ष रविवार से आरंभ होगा। इसे महालयारंभ कहा जाता है। आचार्य पंडित आशुतोष शुक्ला ने बताया कि जिन श्रद्धालुओं के पिताजी की मृत्यु पूर्णिमा तिथि पर हुई हो, वे इस दिन श्राद्ध करेंगे।
पितृपक्ष के दौरान अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध का विधान है, जो 21 सितंबर सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा। आचार्य के अनुसार पंचमी और षष्ठी तिथियों के समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। षष्ठी का श्राद्ध 12 सितंबर अपराह्न 1:31 बजे के बाद ही करना उचित है, यदि कोई श्रद्धालु पूर्वाह्न में करना चाहे तो 13 सितंबर प्रात: 11:04 बजे तक श्राद्ध संपन्न कर सकता है।
अयोध्याकांड में भरत ने राजा दशरथ के लिए बारह दिन तक श्राद्ध किया था।
वहीं, महाभारत में भीष्म पितामह का प्रसंग मिलता है, जिसमें उन्होंने पिता शांतनु के श्राद्ध का वर्णन किया है।
आचार्य आशुतोष शुक्ला ने बताया कि गया में पिंडदान की विशेष मान्यता है। पितरों की तृप्ति से मनुष्य को आयु, संतान, धन, विद्या, राज्य, सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके लिए नियम और संयम जरूरी है।