अंबेडकरनगर। अयोध्या फैसले के बाद अवध क्षेत्र में शामिल अंबेडकरनगर के लोगों की उम्मीदें बढ़ चली हैं। आम लोगों का मानना है कि क्षेत्र के तमाम धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों के जीर्णोद्धार को लेकर भी शासन-प्रशासन का सकारात्मक रुख सामने आ सकेगा। जिन क्षेत्रों को पर्यटक स्थल घोषित किया गया है, वहां की दिशा व दशा में जरूरी सुधार हो सकेगा। ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर अयोध्या पर आए फैसले की महत्ता और ज्यादा बढ़ सकेगी।
अयोध्या मामले में बहु प्रतीक्षित फैसला आने के बाद अवध क्षेत्र में शामिल अंबेडकरनगर की उम्मीदें और भी परवान चढ़ी हुई हैं। दरअसल अवध नरेश रहे दशरथ का क्षेत्र अंबेडकरनगर तक फैला हुआ था। भगवान श्रीराम ने वनगमन के दौरान न सिर्फ अकबरपुर नगर में रात्रि विश्राम किया था वरन राजा दशरथ के शब्दभेदी बाण से मातृ पितृ भक्ति के प्रतीक श्रवण कुमार की मृत्यु भी मडहा व बिसुही के संगम तमसा नदी तट पर हुई थी।
एक तरफ जहां अयोध्या फैसले के बाद इन दोनों धार्मिक स्थलों के कायाकल्प की उम्मीद श्रद्धालुओं को है, वहीं आम लोगों का मानना है कि संपूर्ण अवध क्षेत्र के धार्मिक स्थलों की बेहतरी की वृहद कार्ययोजना सरकार को तैयार करनी चाहिए। ऐसा होने पर ही संपूर्ण अवध क्षेत्र को नया गौरव मिल सकेगा। पवित्र शिवबाबा धाम के महंत ओमप्रकाश गोस्वामी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि अंबेडकरनगर जिले के सभी धार्मिक स्थलों के सौन्दर्यीकरण के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करे। चाहिए कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के ठहरने, पेयजल, साफ सफाई तथा प्रकाश के समुचित इंतजाम हों।
श्रवण क्षेत्र धाम की पुजारी बच्ची दास भी अयोध्या फैसला आने के बाद ढेरों उम्मीद लगाए हैं। उनका कहना है कि श्रवण क्षेत्र को पर्यटक स्थल का दर्जा तो मिला है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। शासन प्रशासन के बीच इस पर्यटन स्थल की बेहतरी के लिए कोई चिंता ही नही दिखती। गायत्री मंदिर के मुख्य ट्रस्टी रामकल्प वर्मा ने कहा कि धार्मिक स्थलों की बेहतरी तय करने से ही अयोध्या फैसले का महत्व और ज्यादा व्यापक हो सकेगा। कंप्यूटर संचालक संजीव कुमार कहते हैं कि पवित्र तमसा नदी के स्वरूप को और व्यापक करने के लिए बड़े पैकेज की जरूरत है।
बीते दिनों कुछ काम तो हुआ, लेकिन अकबरपुर नगर में नदी के किनारे घाट बनवाने तथा मार्ग प्रकाश की व्यवस्था कर इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है। तमसा नदी से भगवान राम की याद जुड़ी है। अकबरपुर में रात्रि विश्राम उन्होंने इसी नदी के किनारे किया था। ऐसे में नदी के जीर्णोद्धार की जरूरत है।