शेष 417 पात्र अभी भी वंचित हैं। वित्तीय वर्ष पूरा होने में महज तीन माह शेष है। ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष यह कार्य वित्तीय वर्ष में पूरा हो पाना असंभव दिख रहा है। आवास सुविधा समय से न मिल पाने के चलते गरीब ठंड में ठिठुरने को विवश हैं।
लोहिया समग्र ग्राम योजना प्रदेश सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। शासन के दिशा निर्देश के मुताबिक इस बार वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले के 29 लोहिया गांवों में कुल 505 पात्रों का चयन हुआ था। पात्रों के हिसाब से जिले को 13 करोड़ 88 लाख 75 हजार रुपए की जरूरत थी।
इसमें 387 बीपीएल कार्डधारक तथा 118 अन्य कार्डधारकों के गरीब परिवारों को शामिल किया गया है। लोहिया आवास योजना के तहत गरीबों का पक्का मकान बनाने के लिए प्रत्येक आवास के लिए 2 लाख 75 हजार रुपए निर्धारित है। इसमें दो कमरे व एक बरामदा के अलावा शौचालय का निर्माण कराना होता है।
प्रथम किस्त के रूप में पात्रों को 1 लाख 37 हजार 500 रुपए की रकम दी जाती है। प्रथम किस्त का उपभोग प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद ही दूसरी किस्त की रकम पात्रों के खाते में निर्गत की जाती है। जिले में लोहिया आवास योजना का हाल यह कि अब तक एक भी आवास का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक सरकार द्वारा समय से रकम न दिए जाने के चलते ही अब तक अधिकांश पात्रों को इसका लाभ नहीं मिल सका। बीते दिनों प्रथम किस्त की रकम महज 88 पात्रों के खाते में भेज जा सकी है। शेष 417 पात्रों को योजना के तहत अब तक प्रथम किस्त की रकम नहीं मिल सकी।
आवास बनानेे की तमाम उम्मीद सजोए गरीब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। लोगों में भय है कि कहीं वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद उन्हें धनराशि ही न उपलब्ध कराई जाए। कई बार इसे लेकर पात्रों ने कार्यालय में दस्तक भी दी, लेकिन कुछ नहीं हो सका। धन न मिलने से अधिकांश गरीबों में आवास मिल पाने की उम्मीद क्षीण होती जा रही है।