जलालपुर (अंबेडकरनगर)। सीएचसी नगपुर में मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। गर्मी के थपेड़ों को सहते हुए शुक्रवार को कई मरीज यहां पहुंचे तो चिकित्सक से लेकर कर्मचारी तक नदारद थे। सामान्य दिनों में यहां 200 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। शुक्रवार को अवकाश के चलते इमरजेंसी सेवा लागू थी, लेकिन कोई भी कर्मी अस्पताल में नहीं था। हद तो यह है कि अस्पताल के बोर्ड पर यह सूचना तक दर्ज नहीं थी कि किस चिकित्सक की इमरजेंसी में ड्यूटी लगी है। नतीजा यह हुआ कि लंबे इंतजार के बाद 8 मरीज लौटने को मजबूर हुए। प्रमाणपत्र के सिलसिले में यहां पहुंचे तीन अन्य नागरिकों को मायूस होकर लौटना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मचारियों के इस रवैये पर कई तीमारदारों ने नाराजगी जताई। कहा कि जिला प्रशासन को संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। उधर, अस्पताल के प्रसव वार्ड में भर्ती महिला को नियमानुसार भोजन व दूध की सुविधा नहीं मिल पाई।
राज्य सरकार एक तरफ अस्पतालों की दशा बेहतर करने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी तरफ चिकित्सकों व कर्मचारियों की मनमानी इन कोशिशों पर भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से मरीजों व तीमारदारों की मुश्किलें बरकरार हैं। कई जरूरी सुविधाएं सिर्फ इसलिए मरीजों को नहीं मिल पा रहीं, क्योंकि उनकी तरफ ध्यान देने की फुर्सत ही जिम्मेदारों को नहीं है। नतीजा यह है कि मरीजों का हाल बेहाल है। शुक्रवार को जलालपुर तहसील के नगपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हालात का जायजा लेने टीम पहुंची तो वहां पूरी तरह मनमानी दिखी।
अवकाश होने के चलते इमरजेंसी सेवा चालू थी। नियमानुसार फार्मासिस्ट समेत अन्य कर्मचारियों को अस्पताल में मौजूद रहना चाहिए था। हालांकि दिन में लगभग साढ़े 11 बजे वहां सन्नाटे का माहौल था। अस्पताल का दरवाजा तो खुला था, लेकिन कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। चिकित्सक भी वहां नहीं मिले। अस्पताल के सूचना बोर्ड पर यह जानकारी अंकित नहीं थी कि किस चिकित्सक की इमरजेंसी में ड्यूटी है और उनका मोबाइल नंबर क्या है। इसी बीच वहां मिले बड़ागांव निवासी रामकिशुन तथा जलालपुर के महेंद्र वर्मा ने बताया कि वे प्रमाणपत्र लेने के लिए यहां आए हैं। पिछले 40-45 मिनट से इधर-उधर भटक रहे हैैं, लेकिन कोई दिख नहीं रहा।
ताराखुर्द से इलाज के लिए पहुंचे परशुराम व परिवार की कलावती अस्पताल के मुख्य गेट पर मिल गए। बताया कि पहले से इलाज चल रहा है। आज दोबारा यहां आए थे, लेकिन कोई चिकित्सक नहीं मिला। अब वापस जाना पड़ रहा है। जलालपुर नगर के वसीम अपनी पुत्री रिजवाना का इलाज कराने अस्पताल आए थे। बताया कि यहां इसी तरह की मनमानी होती है। छुट्टी की जानकारी नहीं थी। इमरजेंसी में तो किसी न किसी को रहना ही था। बताया कि अब जलालपुर नगर के निजी चिकित्सक से इलाज कराया जाएगा। इसी तरह कुछ और मरीज अस्पताल में भटकते दिखाई दिए। इस पर टीम के सदस्यों ने फोन किया तो डॉ. अमित, फार्मासिस्ट सुरेंद्र शर्मा व सुनीता देवी वहां पहुंच गए। इसके बाद अन्य मरीजों का उपचार हुआ।
भर्ती महिला मरीज को नहीं मिला भोजन
सीएचसी नगपुर में तीसरे तल पर स्थित जच्चा-बच्चा वार्ड में चंद्रकला भर्ती थीं। वहां स्टाफ नर्स किरन मौजूद थीं। बताया कि चंद्रकला को प्रसव पीड़ा के चलते यहां भर्ती कराया गया था। गुरुवार शाम को सुरक्षित प्रसव करा लिया गया है। जरूरी देखभाल की जा रही है। उधर, महिला चंद्रकला ने बताया कि कल शाम से भर्ती होने के बावजूद न तो रात का भोजन मिला और न ही सुबह नाश्ते की सुविधा मिल पाई। दूध भी नहीं मिला, जो नियमानुसार मिलना चाहिए। तीमारदारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यहां भर्ती होने वाले मरीजों के साथ इसी तरह का व्यवहार होता है।
वाटर कूलर खराब, कैसे मिले ठंडा पानी
सीएचसी में मरीजों व तीमारदारों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर कूलर की स्थापना की गई थी। शुक्रवार को यह वाटर कूलर ठप मिला। उसमें से ठंडे पानी की बात तो दूर सामान्य पानी तक नहीं निकल रहा था। जानकारी करने पर पता चला कि यह वाटर कूलर लंबे समय से खराब है। इसे दुुरुस्त कराने की जरूरत नहीं महसूस की जा रही है। इससे मरीजों व तीमारदारों को शीतल पेयजल नहीं मिल पा रहा है। तीमारदारों ने कहा कि गर्मी का मौसम लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद भी वाटर कूलर दुरुस्त कराने की तरफ विभाग का ध्यान नहीं है।
किया जा रहा समुचित उपचार
सीएचसी में आने वाले मरीजों का समुचित उपचार किया जा रहा है। दवाएं पर्याप्त उपलब्ध हैं। इमरजेंसी में चिकित्सक व कर्मचारी की ड्यूटी लगती है। यह सभी मौजूद थे। वाटर कूलर दुरुस्त कराने के लिए पत्र लिखा गया है। भर्ती होने वाले मरीजों को नियमानुसार भोजन आदि की सुविधा मिलती है।
डॉ. राकेश कुमार, चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी नगपुर