जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों को लंबे समय से विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी होकर रह गई है। परिसर से लेकर वार्ड तक जगह-जगह कूड़ों का ढेर लगा रहता है। नालियां पूरी तरह बजबजा रहीं हैं। गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है।
इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। पेयजल के लिए मुख्य भवन के निकट लगे हैंडपंप पर पक्का चबूतरा न बना होने से उसके निकट रखे एक लकड़ी के तख्त पर तीमारदारों को कपड़े व बर्तन आदि धोने पड़ते हैं। शौचालय की भी साफ सफाई नहीं की जाती। उसके पाइप जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लेकिन उसे ठीक नहीं कराया जा रहा है।
मरीजों को जो भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, उसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। गुरुवार को अमर उजाला टीम ने वार्डों में भर्ती मरीजों व तीमारदारों से वार्ता की । वार्ड नंबर 1 में मिले तीमारदार सजीवन ने बताया कि रोटी अक्सर जली व अधपकी मिलती है। दाल में पानी की मात्रा अधिक रहती है।
मरीज रेखा ने बताया कि गंदगी के चलते रात्रि में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे पूरी रात उन्हें करवट बदलकर गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ता है। तीमारदार संजय व राधिका ने बताया कि रात के समय चिकित्सक व स्टाफ के अन्य कर्मचारी पूरी तरह लापरवाह बने रहते हैं। अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि कई स्ट्रेचर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वार्डों में जो चद्दर दी जाती है वह भी अक्सर साफ नहीं रहती।