जिला अस्पताल परिसर में ही 200 बेड का भवन बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ के अभाव में उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन 100 बेड वाले पुराने वार्ड में अतिरिक्त बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। तमाम बेड गलियारे में लगा दिए गए हैं।
डायरिया, दमा व सर्पदंश के साथ ही दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों के चलते जिला अस्पताल में इन दिनों मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। अतिरिक्त बेड की जगह न होने की वजह से वे यहां भर्ती नहीं हो पाते।
मौजूदा समय में जिला अस्पताल आने वाले में अलग अलग बीमारियों के मरीजों को भर्ती कराने के लिए तीमारदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को वापस लौटने से बचने के लिए बेडों का अतिरिक्त इंतजाम भी किया लेकिन वह नाकाफी है। बड़ी तादाद में मरीज वापस लौट रहे हैं।
जिला चिकित्सालय में मौजूदा समय में अलग अलग वार्डों में कुल 100 बेड हैं। इमरजेंसी के 18 बेड अलग से हैं। सामान्य दिनों में भी यहां भर्ती होना आसान नहीं रहता। इन दिनों मरीजों की तादाद बढ़ने से मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। पिछले कई दिनों से गलियारों में बेड लगाकर मरीजों को भर्ती करके उपचार किया जा रहा है।
यह स्थिति देख तमाम मरीज भर्ती हुए बगैर ही लौट जाते हैं। मरीजों की परेशानी के मद्देनजर यहां 200 अतिरिक्त बेड के विस्तारित भवन की मंजूरी दी गई थी। लम्बी जद्ददोजहद के बाद 2011 में निर्माण कार्य पूरा हुआ पर अब तक इसमें मरीजों के भर्ती करने का काम शुरू नहीं हो सका है।
लगभग एक वर्ष पूर्व विस्तारित भवन के एक क्षेत्र में 18 बेड की इमरजेंसी सेवा तो शुरू कर दी गई लेकिन 200 बेड का लाभ मरीजों को दिलाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए जा सके। इसका खामियाजा लगातार मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। वार्डों में भीड़ के चलते मरीजों के साथ साथ तीमारदारों को भी मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं।