मुकद्दस रमजान माह के पहले शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोगों ने मस्जिदों में खास नमाज अदा की। इससे पूर्व उलमा ने लोगों से अपील की कि वे इस पवित्र माह में कोई ऐसा कार्य न करें जो अल्लाह की निगाह में गलत हो। यह महीना गुनाहों को माफ कराने का है। ऐसे में अल्लाह की इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगें।
रमजान माह के आगे बढ़ने के साथ ही इबादतों का दौर भी तेजी पकड़ने लगा है। जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्र की मस्जिदों में इफ्तार के बाद होने वाली खास नमाज तरावीह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। लगभग एक से डेढ़ घंटे तक चलने वाली तरावीह में मौलाना कुरआन पाक की तिलावत करते हैं।
इसके बाद लोगों को रोजा के बारे में तफसील से जानकारी दी जाती है। इस बीच माह के पहले शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोगों ने इबादतगाहों पर जुमा की खास नमाज अदा की। मौलाना अबुल फायक ने नमाज के बाद लोगों से आह्वान किया कि वे रमजान माह में न सिर्फ अल्लाह की अधिक से अधिक इबादत करें बल्कि गरीबों में दान भी करें।
शिया जामा मस्जिद अकबरपुर में नमाज से पूर्व मौलाना सै. शुजा हैदर जैदी ने रोजा पर तफसील से रोशनी डालते हुए कहा कि यदि एक माह का रमजान न होता तो करबला की भूख व प्यास का अंदाजा लोगों को न होता। कहा कि एक माह तक रोजा रखने से शरीर के विभिन्न अंगों की मरम्मत हो जाती है।
रोजा सभी बालिग पर वाजिब है। बीमारों पर रोजा नहीं है लेकिन ठीक होने के बाद उन्हें रोजा रखने की हिदायत है। शहजादपुर चौक स्थित मस्जिद में हफीज अहमद ने कहा कि जो लोग रोजा नहीं रख सकते, वे रोजेदारों के सामने इस प्रकार से आएं, जैसे वह स्वयं रोजा हों।
इसके अलावा जलालपुर, टांडा, आलापुर व भीटी तहसील क्षेत्रों में शुक्रवार की खास नमाज अदा की गई। उधर, अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के तत्वावधान में इमामबारगाह में रमजान पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
इसमें बच्चों व लोगों को रमजान पर्व की महत्ता व रोजा से होने वाले लाभ के बारे में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जा रही है। सचिव रेहान जैदी ने बताया कि पूरे माह यह कार्यक्रम चलता रहेगा।