अंबेडकरनगर। रिश्वतखोरी में दूसरों को जेल भेजने वाले पुलिसकर्मी यहां खुद रिश्वतखोरी में पकड़े जाने के बाद भी मौज काट रहे हैं। बीते दिनों मालीपुर, बेवाना, अहिरौली व इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र में छह से अधिक पुलिस कर्मियों का रिश्वत लेते या रिश्वत की बात करने का वीडियो व ऑडियो वायरल हो चुका है। इसके बाद भी इनमें से किसी भी पुलिस कर्मी के विरुद्ध न तो केस दर्ज कराया गया और न ही कठोर विभागीय कार्रवाई की गई। ज्यादातर मामलों में सिर्फ लाइन हाजिर करने की ही रस्म अदायगी निभाई गई। नतीजा यह है कि पुलिस कर्मियों की ओर से रिश्वत लेने या फिर इसके लिए उत्पीड़न करने के मामले नहीं थम पा रहे हैं।
उत्पीड़न कर रिश्वत मांगने के किसी भी मामले के पकड़े जाने पर पुलिस कर्मी ही संबंधित व्यक्ति को जेल भेजने का काम करते हैं। पुलिस कर्मियों से यह उम्मीद आम जनमानस को रहती है कि वे गड़बड़ी करने वालों को सबक सिखाते हुए उन्हें संबंधित अपराध में जेल भेजना सुनिश्चित करेंगे। इस आम धारणा के विपरीत जिले में कुछ दूसरी ही तस्वीर उभरकर सामने आई है। एक तरफ जहां तमाम स्थानीय पुलिस कर्मियों की संवेदनशीलता व कर्तव्य परायणता के उत्कृष्ट उदाहरण जिले में सामने आते रहते हैं, वहीं ऐसे कई पुलिस कर्मी हैं, जो खुद रिश्वतखोरी व उगाही आदि में लिप्त होने के बाद भी जेल जाने की बजाय मौज काट रहे हैं। ऐसे में जो सकारात्मक संदेश आम नागरिकों के बीच जाना चाहिए, वह नहीं जा पा रहा।
लगभग एक वर्ष पहले अहिरौली थाने में तैनात रहे दरोगा सुनील वहां से हटकर जब पुलिस लाइन गए तो अवैध वसूली व उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा ऑडियो वायरल हुआ। इसमें वैधानिक कार्रवाई नहीं तय हो पाई। लगभग चार माह पूर्व बेवाना थाना प्रभारी रहे जितेंद्र सिंह का एक अपराधी के घर छापा डालने से पहले उसके भाई को जानकारी देने का ऑडियो वायरल हुआ। इसके दो दिन बाद ही उसी अपराधी के भाई से जिला मुख्यालय की एक प्रतिष्ठित दुकान से कई डिब्बा मिठाई खरीदवाते थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह का वीडियो वॉयरल हुआ। रिश्वतखोरी की परिधि में आने वाले इस कृत्य के बावजूद वैधानिक कार्रवाई के बजाय सिर्फ पुलिस लाइन भेज देेने की रस्म अदायगी निभाई गई।
बेवाना थाना प्रभारी की करतूत वायरल होने के चंद दिन बाद ही मालीपुर थाने के दरोगा असलम का ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वे मन मुताबिक रिपोर्ट लगाने के लिए बुलेट बाइक की मांग कर रहे थे। दरोगा को लाइन हाजिर किया गया, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। अब बीते दिन पशु वध कराने के एवज में अवैध वसूली के बंटवारे के विवाद में एक वीडियो वायरल होने को लेकर इब्राहिमपुर थाने के चार सिपाही लाइन हाजिर हुए हैं। यहां भी केस दर्ज कराने या वैधानिक कार्रवाई कराने की जरूरत नहीं महसूस हुई।
रिश्वतखोरी में की जाए कड़ी कार्रवाई
अधिवक्ता आनंद द्विवेदी व संजय तिवारी ने कहा कि अवैध वसूली व रिश्वतखोरी के ऐसे मामलों में सीधे केस दर्ज कराया जाना चाहिए। ऐसा न भी हो पाए तो अविलंब जांच पूरी कराकर कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहिए। लाइन हाजिर या फिर निलंबित किए जाने के बाद पुलिस कर्मियों को भी आमतौर पर यह पता रहता है कि अगले कुछ दिनों में अपवाद छोड़कर बहाली मिल जाती है। इसी धारणा के चलते पुलिस कर्मियों की मनमानी लगातार जारी है। व्यवसायी नरेंद्र जायसवाल ने कहा कि पुलिस कर्मियों के अवैध वसूली में लिप्त पाए जाने पर और ज्यादा कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा होने पर पुलिस के प्रति समाज में जो विश्वास है, वह कायम रह सकेगा। लाइन हाजिर करना सामान्य सा मामला है। रिश्वतखोरी व अवैध वसूली में संलिप्त पाए जाने पर संबंधित पुलिस कर्मियों के विरुद्ध सभी संभव कठोरतम कार्रवाई करना चाहिए। सेवानिवृत्त शिक्षक वीरेंद्र सिंह ने कहा कि तमाम थानों में अक्सर अवैध वसूली के लिए उत्पीड़न होता रहता है। वीडियो व ऑडियो तो इक्का दुक्का मामलों का ही बन पाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि किसी भी तरह के वीडियो व ऑडियो में रिश्वतखोरी पाए जाते ही संबंधित पुलिस कर्मी को कड़ी सजा दी जाए। उसे बचाने की कोई कोशिश नहीं होनी चाहिए।
तत्काल की जाती है कार्रवाई
किसी भी तरह की गड़बड़ी में कोई पुलिस कर्मी लिप्त पाया जाता है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों कई पुलिस कर्मी निलंबित व लाइन हाजिर किए जा चुके हैं। कुछ पुलिस कर्मियों को प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी गई है।
- अवनीश कुमार मिश्र, एएसपी