अंबेडकरनगर। राजेसुल्तानपुर के हनुमानगढ़ी खरुवइया में चल रहे श्रीमारुति यज्ञ के चौथे दिन प्रवचन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
प्रवाचक उमाशंकर महाराज ने भगवान श्रीराम के अवतरण की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म, अत्याचार और पाप बढ़ता है, तब भगवान इस धरा पर अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ने मनु और सतरूपा को वचन दिया था कि वे उनके पुत्र रूप में अवतरित होंगे। वही वचन निभाने के लिए भगवान श्रीराम ने महाराज दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र रूप में जन्म लिया। प्रवाचक ने कहा कि महाराज दशरथ की तीन रानियां कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा थीं। विवाह के कई वर्षों बाद भी संतान नहीं हुई, लेकिन दशरथ ने कभी इसकी चिंता नहीं की। मनु और सतरूपा ने भगवान से वचन मिलने के बाद धैर्य नहीं खोया। प्रवचन के पश्चात रात्रि में रासलीला कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ।