अंबेडकरनगर। बसपा प्रमुख मायावती की डांट सुनने के बावजूद मैंने ही उन घनश्याम चंद्र खरवार को दोबारा बसपा में शामिल कराया था जो आज यहां खुद को सर्वेसर्वा साबित कर बसपा को कमजोर करने में लगे हुए हैं। मैंने ही बहन मायावती के आगमन पर उनकी अनुमति से खरवार की पार्टी में वापसी की घोषणा की थी। मैंने अपनी पत्नी की मौत के बावजूद सभी क्रियाकर्म पूरे होने से पहले खरवार के लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत लगाई थी। वे आज यह सब भूल गए। संगठन से लेकर निजी हित में मेरे द्वारा किए गए कार्य को उन्हें याद रखना था। यह पीड़ा और आक्रोश बसपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रामअचल राजभर ने शुक्रवार को अमर उजाला से बात करते हुए प्रकट किए।
जिला मुख्यालय पर मीडिया से बात करते समय रामअचल ने जोनल कोऑर्डिनेटर घनश्याम चंद्र खरवार को आड़े हाथों लिया। बोले कि चरित्र से जुड़ा मामला सामने आने के बाद खरवार को बहनजी ने 2005 में निकाल दिया था। कई दलों की सवारी के बाद भी कहीं ठिकाना नहीं मिला तो मैंने बसपा प्रमुख से बात की।
वे मुझ पर नाराज हुईं, लेकिन मैंने प्रयास जारी रखा। कुछ दिन बाद जब 2012 में अकबरपुर की जनसभा में आईं तो मैंने मंच से उतरने के बाद फिर बात रखी। वे पहले आगे बढ़ गईं, लेकिन कुछ सोचकर लौटीं और घनश्याम चंद्र खरवार को ठीक से रहने की हिदायत देते हुए बोलीं कि जाओ घोषणा कर दो। इसके बाद मैं मंच पर गया और खरवार को पार्टी में शामिल किए जाने की घोषणा की।
पूर्व महासचिव ने कहा कि वर्ष 1996 में जब खरवार को अकबरपुर से लोकसभा का टिकट मिला था तो उसी समय मेरी पत्नी का निधन हो गया। मैं उनका दाह संस्कार करने के तत्काल बाद से प्रचार और संसाधन का प्रबंध करने में जुट गया। वे चुनाव जीत भी गए। राम अचल ने कहा कि निजी तौर पर मेरी ममिया सास ने उनके परिवार की सेवा की। मैं हर मौके पर खड़ा रहा, लेकिन आज वे हम लोगों के खिलाफ ही बहन जी तक गलत बातें पहुंचा कर हमेें पार्टी से बाहर कराने की भूमिका बना रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि बसपा से निकाले जाने के बाद खरवार जब महान दल में थे तो बहन मायावती के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते थे। सार्वजनिक मंच से भला बुरा कहते थे। आज वे खुद को सबसे समर्पित बताने की कोशिश कर रहे हैं। हम लोग बसपा में रचे-बसे हैं। आज निकाले जाने के बाद भी हम सब बहन जी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। हमें बहन जी से समय मिलने का इंतजार है। हम बसपा के लिए ही कार्य करते रहेंगे।