उल्लेखनीय है कि जिले में गेहूं भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं है। सिर्फ टांडा में ही भारतीय खाद्य निगम का भंडारण है। गेहूं खरीद की धीमी प्रगति का यह भी मुख्य कारण है।
प्रतिकूल मौसम से उबरने के बाद अब बची खुची उपज की बिक्री को लेकर किसान परेशान हैं। गेहूं बिक्री के लिए उन्हें एक केंद्र से दूसरे केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है। केंद्र प्रभारियों की मनमानी के चलते उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है।
गेहूं बिक्री के लिए किसानों को किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए शासन के निर्देश पर विगत दो अप्रैल से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित छह एजेंसियों के 62 केंद्रों व 4 पंजीकृत सोसाइटी पर खरीद का कार्य शुरू हुआ पर केंद्र प्रभारियों की मनमानी के चलते खरीद कार्य कभी भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया।
खरीद में तेजी लाने एवं समय पर लक्ष्य की पूर्ति किए जाने को लेकर जिले में 32 आढ़तियों का भी चयन किया गया। इसके बाद भी खरीद का कार्य आगे नहीं बढ़ सका
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक छह केंद्रों पर 1575.80 एमटी, पीसीएफ के 31 केंद्रों पर 3956.65 एमटी, यूपीएसएस के 19 केंद्रों पर 2401.50 एमटी, यूपीस्टेट एग्रो के एक केंद्र पर 104 एमटी, राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के 3 केंद्रों पर 440.75 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के 2 केंद्रों पर 1778.90 एमटी, 4 पंजीकृत सोसइटी पर 1234.50 एमटी व 32 आढ़तियों 7539.50 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है।
इस प्रकार कुल 98 केंद्रों पर 3712 किसानों का 19031.60 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद की जा सकी है। खाद्य एवं विपणन अधिकारी अविनाश कुमार झा ने बताया कि जिन किसानों का गेहूं खरीदा गया है, उनका भुगतान कर दिया गया है।