अंबेडकरनगर। लगभग डेढ़ माह में सिर्फ 18 प्रतिशत धान की खरीद हो सकी है। पांच एजेंसियों ने 6,364 किसानों का करीब तीन हजार एमटी धान खरीदा है। किसानों ने कहा कि खरीद में तेजी लाने के लिए केंद्रों पर अतिरिक्त कांटों की व्यवस्था की जाए।
धान बेचने के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। पहली नवंबर से जिले में 75 क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू हुई। शुरुआती दौर में कुछ दिनों तक हाईब्रिड धान को लेकर बिल की अनिवार्यता का संकट खड़ा रहा। बाद में सामान्य प्रजाति के धान आने पर खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ी।
इसके बावजूद अब तक जिले को मिले 1.55 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत धान की ही खरीद हो सकी है। खाद्य विभाग के 22 क्रय केंद्रों पर 2,563 किसानों का 11451.88 मीट्रिक टन, पीसीएफ के 40 क्रय केंद्रों पर 3,019 किसानों का 14053.55 एमटी, यूपीएसएस के आठ केंद्रों पर 487 किसानों का 2,400 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है।
वहीं, मंडी समिति के चार केंद्रों पर 170 किसानों के 660.60 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र पर 125 किसानों के 29.68 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है।
अकबरपुर के किसान रामजीत व मंगल ने कहा कि दो तरह का धान है। एक मोटा है तो दूसरा मंसूरी प्रजाति का धान है। समस्या यह है कि क्रय केंद्रों पर मोटे धान की सुचारु रूप से बिक्री नहीं हो पा रही है। इसके लिए जीएसटी बिल मांगा जा रहा है। ऐसे में आखिर मोटा धान कहां बेचें।
भीटी के किसान घनश्याम व जलालपुर के गंगाराम ने कहा कि क्रय केंद्र पर बरती जाने वाली लापरवाही के चलते ही धान खरीद में तेजी नहीं आ रही है। जीएसटी बिल तो बाधा उत्पन्न कर ही रही है, सुचारु बिजली भी क्रय केंद्र को नहीं मिल रही है। इससे भी धान खरीद प्रभावित हो रहा है। किसानों ने कहा कि धान की खरीद में तेजी लाने के लिए क्रय केंद्रों पर अतिरिक्त कांटे की व्यवस्था करनी चाहिए।
किसानों के धान की खरीद सुचारु ढंग से चल रही है। वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी हो रही है। समय रहते लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
-राजेश कुमार, खाद्य एवं विपणन अधिकारी