आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के मालपुर बसहिया स्थित ब्रह्मस्थान प्रांगण में श्रीराम कथा के चौथे दिन शनिवार को भगवान राम के बाल्यकाल, शिक्षा-दीक्षा, मिथिला आगमन और विवाह प्रसंग का वर्णन किया। प्रवाचक रघुवीर दास ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अल्प समय में समस्त विद्याओं में प्रावीण्य प्राप्त किया।
महर्षि विश्वामित्र की ओर से यज्ञ रक्षा के लिए श्रीराम-लक्ष्मण को साथ ले जाना, असुरों का संहार करना और धनुर्विद्या की शिक्षा ग्रहण करना कथा के प्रमुख प्रसंग रहे। इसके साथ ही उन्होंने अहिल्या उद्धार की घटना का भी वर्णन किया। भगवान श्रीराम का जीवन ज्ञान, भक्ति और धर्म का अनुपम उदाहरण है। बाल्यकाल से ही उनके आचरण में मर्यादा, करुणा और परोपकार की झलक मिलती है, जिसे देखकर प्रत्येक भक्त प्रेरित होता है। पुष्प वाटिका में भगवान श्रीराम के सौंदर्य और दिव्यता का वर्णन करते हुए कहा गया कि मानो स्वयं पुष्प उनके चरणों में अर्पित हो रहे हों। श्रीराम का जीवन समाज के लिए आदर्श है। जीवन में सदैव नैतिकता और धर्म का पालन करना चाहिए। बच्चों और युवाओं में संस्कार और भक्ति की भावना विकसित करना जीवन का सार है। परिवार और समाज में अनुशासन और मर्यादा का पालन करके समाज को उन्नत बनाया जा सकता है। इस दौरान राकेश, पवन, विपिन व अन्य उपस्थित रहे।