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संवेदनशील का दर्जा पर संसाधन नहीं

Thu, 03 Dec 2015 11:08 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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स्थानीय अभिसूचना इकाई के मामले में तो यह लापरवाही काफी चिंताजनक है। हालात यह हैं कि इस टीम में उपनिरीक्षक के सभी 6 पद खाली चल रहे हैं। अन्य पदों पर भी सृजन के सापेक्ष तैनाती नहीं है।
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संसाधनों की कमी से जूझ रही इस इकाई ने बीते वर्षों में कई सटीक जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराई है तो कुछ विफलताएं भी इसके खाते में दर्ज हैं। इन सबके बीच मैनपावर की कमी प्रशासन की इस सबसे महत्वपूर्ण  इकाई माने जाने वाली टीम पर भारी पड़ रही हैै।

उल्लेखनीय है कि टांडा  में हिंदू नेता रामबाबू गुप्त और उसके बाद उनके भतीजे  राममोहन गुप्त की  हत्या के साथ ही जहांगीरगंज नरियांव में हुई गुटीय संघर्ष की घटनाओं ने इस जिले को संवेदनशील श्रेणी में शुमार कर रखा है।  किसी भी पर्व आदि के मामले  में इस जिले की सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था को  लेकर चिंता ऊपर तक दिखाई पड़ती है, लेकिन बुनियादी जरूरतों को पूरा करने  की तरफ किसी का ध्यान नहीं  है।
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प्रशासन के लिए गोपनीय सूचना समय रहते उपलब्ध कराकर अभिसूचना इकाई उससे निपटने का आधार तैयार करती है ।  संवेदनशील मामलों में इस इकाई  की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। जिले में इस टीम पर  जिम्मेदारी तो बढ़ी है, लेकिन आवश्यक संसाधनों  का टोटा सा पड़ा रहता है।  सबसे ज्यादा दिक्कत मैनपावर को लेकर है।
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