अंबेडकरनगर। उमस भरी भीषण गर्मी के बीच जिला अस्पताल में पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लगभग एक पखवाड़े से वार्डों में सुचारुरूप से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजा यह है कि मरीजों व तीमारदारों के समक्ष पीने के पानी से लेकर वार्डों में बने शौचालय के प्रयोग में मुसीबत हो रही है।
उन्हें परिसर में लगे हैंडपंप या फिर परिसर के बाहर स्थित होटलों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या रात के समय होती है। शौचालय में पानी न होने से मरीजों व तीमारदारों को मुश्किलें उठानी पड़ती हैं। पेयजल समस्या दूर कराए जाने की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी सुध नहीं है।
जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों के साथ ही उनके तीमारदार इन दिनों पानी की अभूतपूर्व समस्या से जूझ रहे हैं। उमसभरी भीषण गर्मी के बीच बीते एक पखवाड़ें से वार्डों तक समुचित पानी न पहुंचने से पेयजल के लिए मरीजों व तीमारदारों को इधर उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। बताया जाता है कि लगभग एक पखवारे पूर्व वॉटर सप्लाई के लिए लगा मोटर जल गया था। इस पर ठेकेदार द्वारा नया मोटर लगाया गया। मोटर में अब इलेक्ट्रॉनिक स्टार्टर लगा दिया गया है। इसके चलते यदि वोल्टेज में वृद्धि या कमीं होती है, तो मोटर कार्य करना बंद कर देता है। इससेे पानी टंकी तक नहीं चढ़ पाता।
बीते एक पखवारे से मोटर के रुक रुककर कार्य करने से टंकी में मौजूद पानी कुछ ही देर में समाप्त हो जाता है। मरीजों के अनुसार दिन में यदि किसी समय मोटर चल जाता है, तो टंकी में कुछ पानी पहुंच जाता है। कुछ ही देर में वह समाप्त हो जाता है। दिन में तो किसी प्रकार काम चल जाता है, लेकिन रात में अधिक मुश्किलें उठानी पड़ती हैं। रात दस बजे से लेकर सुबह आठ बजे तक जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में बूंदबूंद भर पानी के लिए मरीज व उनके तीमारदार तरस जाते हैं।
वार्ड नंबर एक में भर्ती बरियावन के रामभुवन ने कहा कि वार्ड में पानी न होने के चलते पेयजल के अलावा नित्य कार्य के लिए बाहर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसमें कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। बरियावन की गायत्री ने कहा कि वह पिछले चार दिन से वार्ड नंबर एक में भर्ती है। वार्ड में सुचारु रूप से पानी न आने के चलते उसे दैनिक कार्य के लिए बाहर से पानी लेने के लिए जाना पड़ता है।
कभी कभी जब तीमारदार नहीं होते और पानी की जरूरत पड़ती है, तो उसे खुद ही इसके लिए बाहर जाना पड़ता है। इससे उसे परेशानी उठानी पड़ती है। वार्ड दो में भर्ती मरीज के तीमारदार जमुनीपुर निवासी रामचंद्र बाहर से बोतल में पानी लेकर वार्ड की तरफ जा रहे थे। पूछने पर कहा कि वार्ड में पानी नहीं है। ऐसे में पेयजल के लिए बोतल में पानी लेकर जाना पड़ रहा है।
एक अन्य मरीज राजेंद्र ने कहा कि सबसे अधिक मुश्किल सुबह के समय होती है। शौचालय में पानी न होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वार्ड दो में भर्ती भीटी की सलमा के पति ने कहा कि इसकी शिकायत आनलाइन मुख्यमंत्री से भी की, लेकिन कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया जा सका है। इसका खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। उधर ठेकेदार गुड्डू सिंह ने बताया कि ब्रांडेड मोटर लगाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक स्टार्टर के चलते समस्या हो रही है। जानकारी मिली है। सोमवार को गड़बड़ी दूर कर दी जाएगी।
सीएमएस डॉ. एसपी गौतम ने कहा कि लगभग एक पखवारा पूर्व ही नया मोटर लगाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक स्टार्टर होने के चलते वोल्टेज बढ़ने व घटने पर मोटर कार्य नहीं करता। इससे पेयजल का संकट खड़ा हो रहा है। इसकी जानकारी संबंधित ठेकेदार को दे दी गई।