अंबेडकरनगर/ सद्दरपुर। जिला अस्पताल अकबरपुर के नर्सिंग अधिकारी के बेटे का शव रविवार को सरकारी आवास में पंखे के सहारे फंदे से लटकता मिला। इकलौते बेटे की मौत से परिजनों में चीख पुकार मच गई। उनका रो-रोकर बुरा हाल है।
बलिया के साहपुर टिटिहा बहरामपुर निवासी बांके प्रसाद जिला अस्पताल अकबरपुर में नर्सिंग अधिकारी के पद पर तैनात हैं। पत्नी उषा देवी भी अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। दो संतानों में छोटी बेटी प्रिया बीएससी नर्सिंग के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है। बड़ा बेटा पवन (29) कानपुर में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था।
पवन दो दिन पूर्व माता-पिता से मिलने अकबरपुर आया था। शनिवार रात खाना खाने के बाद अपने कमरे में सो गया। रविवार सुबह बांके प्रसाद सोकर उठे तो उन्होंने बेटे को चाय पीने के लिए आवाज दी। काफी इंतजार के बाद पवन बाहर नहीं आया तो उन्होंने खिड़की से झांककर कमरे में देखा।
अंदर पवन का शव छत में लगे पंखे के सहारे बेडशीट के फंदे से लटका देख उनके होश उड़ गए। चीख सुनकर मां ऊषा देवी और आसपास के घरों में रहने वाले तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। पुलिस की मौजूदगी में परिजनों ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा। इसके बाद फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्र किए। मौके पर दवा का एक परचा मिला है। पुलिस के अनुसार युवक का डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। कोतवाल श्रीनिवास पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का कारण पता चल सकेगा।
अवसाद से बचने के लिए करें उपाय
मनोचिकित्सक डॉ. अब्दुल हलीम का मानना है कि पिछले कुछ समय से परीक्षा की तैयारी से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बढ़ी हैं। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों पर अकादमिक उत्कृष्टता का दबाव नहीं बनाना चाहिए और न ही दूसरों से तुलना करनी चाहिए। छात्रों को ध्यान, योग, गहरी सांस लेने के व्यायाम और अन्य तनाव-मुक्ति तकनीकों का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। पढ़ाई के साथ-साथ पर्याप्त नींद, पौष्टिक आहार और शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना महत्वपूर्ण है।