पेयजल के लिए लगीं टंकियों की भी लंबे समय से साफ-सफाई नहीं की गई। और तो और सरकारी दफ्तरों में भी पेयजल की टंकियों की साफ सफाई करने को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। सार्वजनिक स्थलों पर लगे हैंडपंपों के इर्दगिर्द हमेशा गंदगी बना ररहती है।
बरसात के मौसम में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका अधिक होती है। इसलिए इस पर अंकुश पाने के लिए साफ सफाई पर विशेष जोर दिया जाता है। साफ सफाई को लेकर दिए गए तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी जिले में इस बाबत अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
आलम यह है कि सरकारी विद्यालय हों या फिर सरकारी दफ्तर सभी जगह साफ-सफाई को लेकर मनमानी का माहौल है। प्राथमिक विद्यालय बदलपुर परिसर में लगे इंडिया मार्का टू हैंडपंप के इर्दगिर्द गंदगी का अंबार है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से न सिर्फ गंदा पानी सदैव एकत्र रहता है, वरन चारों तरफ कूड़े का ढेर भी लगा हुआ है। इसके चलते छात्र छात्राओं को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
इसी प्रकार जिला चिकित्सालय में मरीजों व उनके तीमारदारों तथा आवासीय कालोनी में रहने वाले चिकित्सकों के परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगी पानी की टंकी की साफ सफाई लंबे समय से नहीं की जा सकी है। टंकी पर ही बड़ी बड़ी जंगली घासें उग आई हैं।
ऐसे में इस टंकी से शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद रखना बेमानी ही होगी। कुछ ऐसा ही हाल अकबरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित पानी की टंकी का भी है। इसके चारों तरफ फैली गंदगी को देखकर ऐसा लगता है कि लंबे समय से इस टंकी की साफ सफाई नहीं की गई है।
इतना ही नहीं, नगर पालिका परिषद अकबरपुर द्वारा लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई है, वह अक्सर क्षतिग्रस्त होती रहती है।
इससे नाले व नाली का गंदा पानी उसमें मिल जाता है। नतीजा यह होता है कि लोगों के घर पहुंचने वाला पानी अत्यंत गंदा होता है, जिसके चलते इसका समुचित प्रयोग नहीं किया जाता। इसकी शिकायत भी की जाती है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।