अंबेडकरनगर। नियमित टीकाकरण को लेकर पूरी तरह बेफिक्री का माहौल है। 13 से 24 फरवरी तक नियमित टीकाकरण का महाअभियान चल रहा है। इस दौरान वैक्सीन स्टोर पर जहां बीसीजी का टीका खत्म है तो वहीं पीसीवी का टीका भी नदारद है। बीसीजी व पीसीवी का टीका लगवाने के लिए लोग एक वर्ष तक के बच्चे को लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन मायूसी ही हाथ लग रही है। टीका से संबंधित रिपोर्ट कार्ड भी समाप्त हो चुका है।
इन दिनों नियमित टीकाकरण का महाअभियान चल रहा है। इस दौरान बच्चों को बीसीजी व पीसीवी का टीका लगाने के साथ ही कई अन्य टीके भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन सबके बीच बीसीजी व पीसीवी का टीका स्वास्थ्य केंद्रों से पूरी तरह नदारद है जिससे नियमित टीकाकरण अभियान को तगड़ा झटका लग रहा है।
पीसीवी तो जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों से नदारद है जबकि जिला वैक्सीन स्टोर में बीसीजी भी समाप्त हो गया है। हालांकि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर नाममात्र के लिए बीसीजी का टीका उपलब्ध है। नतीजतन एक वर्ष तक के बच्चों को टीका लगवाने के लिए लोग अस्पतालों पर पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है। इस बीच टीके से संबंधित रिपोर्ट कार्ड भी समाप्त हो गया।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चों को टीका लगवाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है। शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही हाल रहा। लगभग पूरे दिन लोग एक वर्ष तक के बच्चों को टीका लगवाने के लिए पहुंचते रहे लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। मजबूरन उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से 100 रुपये में बीसीजी का टीका खरीदकर लगवाना पड़ा।
अहलादे निवासी बबिता अपने डेढ़ माह के पौत्र को बीसीजी का टीका लगवाने के लिए शुक्रवार को जिला अस्पताल पहुंची थीं। जानकारी दी गई कि न तो टीका है और न ही बीसीजी सिरिंज ही है। अब टीका तो लगवाना ही था। इसलिए निजी मेडिकल स्टोर से मंगवाना पड़ा। इसके बाद टीका लग सका।
बट्टूगढ़ निवसी संतोष लगभग दो माह के बच्चे को लेकर टीका लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। बीसीजी व पीसीवी का टीका लगवाना था। उन्हें मायूसी हाथ लगी। कारण यह कि यह दोनों टीके अस्पताल में उपलब्ध नहीं थे। सिरिंज भी नहीं थी। कहा कि टीका लगवाने के लिए निजी मेडिकल से मंगवाना पड़ा।
जिला वैक्सीन स्टोर पर ही बीसीजी व पीसीवी समाप्त है। मौजूदा समय में सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पीसीवी समाप्त है जबकि कुछ केंद्रों पर नाममात्र बीसीजी है। इनकी उपलब्धता के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
-डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी