ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों की खोदाई आदि को लेकर भी अफसर उदासीन हैं। शहरी क्षेत्रों में जगह जगह तथा रेलवे व बस स्टेशन क्षेत्र में भी अक्सर पानी की टोटियों के बिगड़े होने के कारण पानी बहता रहता है, लेकिन इन्हे दुरुस्त कर पानी की बर्बादी रोकने की परवाह प्रशासन नहीं कर रहा है।
पानी का जलस्तर अलग अलग क्षेत्रों में लगातार कम हो रहा है। इसे देखते हुए ही वर्षा जल के संचयन पर जोर हाल के वर्षों में बढ़ा है। प्रमुख सरकारी व निजी भवनों में यह अनिवार्यता कर दी गई है कि छतों पर वर्षा जल को एकत्र करने तथा उसे भूमि के भीतर तक पहुंचाने के प्रबंध तय किए जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी अलग अलग योजनाएं हैं, लेकिन शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कहीं भी वर्षा जल के संचयन को लेकर प्रशासन गंभीर नजर नहीं आता। हालत यह है कि विकास भवन में वर्षा जल के संचयन को लेकर जो प्रबंध हैं भी, वह निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं।
कलक्ट्रेट, जिला अस्पताल, जिला पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय समेत कई अन्य भवनों में वर्षा जल के संचयन को लेकर कोई चिंता या प्रयास लंबे समय से दिख नहीं सके हैं। मनमानी व लापरवाही की दशा यह है कि विभिन्न सरकारी कार्यालयों के जो नए भवन बन भी रहे हैं, उनमें ऐसे प्रबंध करने की तरफ कोई ध्यान नहीं है।
जिला मुख्यालय पर लगातार एक एक कर तमाम सरकारी भवन बन रहे हैं। इन सभी भवनों में यदि वर्षा जल के संचयन का प्रबंध कर दिया जाए, तो भी अकबरपुर नगर में पानी का भूस्तर काफी हद तक सुधारा जा सकेगा।
जिले का भीटी ब्लॉक पेयजल स्तर के मामले में काफी चिंताजनक है। यह क्रिटिकल जोन की श्रेणी में आता है। इस ब्लाक के कई गावों में पानी का स्तर काफी नीचे है।
इसके बावजूद यहां कोई विशेष प्रबंध नहीं किया जा रहा है। अधिकाधिक तालाबों की खोदाई करवाकर वर्षा जल को संचयित करने का काम आसानी से हो सकता है, लेकिन इस ब्लाक में तालाबों की खोदाई को लेकर कोई विशेष कार्य योजना नहीं बनाई जा सकी है।
जहांगीरगंज, भियांव व बसखारी ब्लाक के कई गावों में भी पेयजल का स्तर सुधारे जाने की जरूरत है। यह बात अलग है कि प्रशासनिक स्तर पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पुराने ही तालाबों की बदहाली दूर करने की सुध प्रशासन को नहीं है।
एेसे में नए तालाबों की खुदाई को लेकर प्रशासन के रवैये का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं रेलवे स्टेशन व बस स्टेशन पर अक्सर बिगड़ी हुई टोटियों से पानी इधर उधर बहता रहता है। कई कई दिन बीत जाते हैं, लेकिन उसे ठीक कराने की सुध संबंधित को नहीं होती। नगर परिषद क्षेत्रों में भी यही हाल है। गली मोहल्लों में अक्सर बिगड़ी पड़ी टोटियों से पानी बहता नजर आता है।