अंबेडकरनगर। फर्जी आईंएएस बनकर ग्रामीणों पर रौब जमाने वाला नंदलाल ग्रामीणों के बीच पहेली बन गया है। वह लग्जरी कार पर यूपी सचिवालय का जो पास लगाकर आता था, वह असली था या फर्जी यह जांच के दायरे में है। असली था तो कहां से मिलता था और नकली था तो इसे बनाने वाले रैकेट में कौन-कौन शामिल था। गनर को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। उसे पकड़ा नहीं जा सका इसे लेकर जिला पुलिस के साथ ही एसटीएफ पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बता दें कि हंसवर निवासी नंदलाल स्वर्णकार बीते दिनों एनआईए की गिरफ्त में आ गया था। उसके विरुद्ध झारखंड प्रांत के बेड़ो थाने में वर्ष 2016 में नोटबंदी के दौरान केस दर्ज हुआ था। इसमें नक्सलियों के लिए पैसा जमा करने आदि का आरोप था। इसी मामले में एनआईए ने नन्दलाल को गिरफ्तार किया है। उसके विरुद्ध दिल्ली में भी केस दर्ज हुआ था। बुधवार के अंक में अमर उजाला ने खुलासा किया था कि वह अपने गांव आता था तो गनर व नीली बत्ती की गाड़ी लेकर पहुंचता था। शादीशुदा नन्दलाल पत्नी व दो बेटियों के साथ दिल्ली में रहता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार वह गांव में खुद को बड़ा अफसर बनने की जानकारी देता था। ऐसे में किसी ने उसके आइएएस होने का अनुमान लगाया था तो वहीं उसके कुछ दोस्तों ने बताया था कि वह पीएमओ में तैनात है। अब जबकि उसकी कलई खुल गई है तो बड़ा सवाल यह कि वह सचिवालय का पास लगी जो गाड़ी लेकर आता था उस पर लगा पास असली रहता था या नकली।
लोगों का कहना है कि पास यदि असली था तो इसकी जांच होनी चाहिए कि उसे यह पास उपलब्ध कौन कराता था। पास यदि नकली रहता था तो यह जांच होनी चाहिए कि ऐसे फर्जी पास बनाने वाले रैकेट में कौन कौन शामिल हैं। किसी तरह की जांच उसके साथ अक्सर आने वाले गनर को लेकर होनी चाहिए। यह जांच भी होनी चाहिए कि फर्जी गनर या फिर फर्जी तरीके से सचिवालय पास लगाकर वह लखनऊ से अक्सर हंसवर तक आता-जाता रहा, लेकिन लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या व अंबेडकरनगर पुलिस समेत एसटीएफ को इसकी भनक क्यों नहीं लग सकी। उधर एसपी वीरेंद्र कुमार मिश्र ने इस प्रकरण पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
एनआइए ने नंदलाल का आपराधिक ब्योरा जिला पुलिस से तलब किया था। पुलिस-प्रशासन ऐसी कोई जानकारी नहीं दे रहा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार हंसवर समेत किसी थाने में उसके विरुद्ध कोई मुकदमा नहीं पाया गया है।