फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambedkar Nagar News: रमजान के पहले जुमे पर अदा हुई नमाज, मांगी अमन-चैन की दुआ

Fri, 07 Mar 2025 10:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
विज्ञापन
किछौछा के मखदूम अशरफ दरगाह पर इबादत करने पहुंचीं महिला श्रद्धालु।
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। रमजान के पहले जुमे की नमाज के लिए शहर की तमाम मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ उमड़ी। नमाज अदा कर मुल्क और कौम की तरक्की और खुशहाली की दुआ की गई। वहीं, जुमे की नमाज को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस भी अलर्ट नजर आई। पुलिस ने धर्मस्थलों के आसपास गश्त कर और तैनात रहकर निगरानी की।
विज्ञापन

रमजान में वैसे तो हर दिन खास है, लेकिन जुमे का और अधिक महत्व माना जाता है। अगर कोई पूरे रोजे नहीं रखता तो जुमे के दिन रोजा अवश्य रखता है। ऐसे में शुक्रवार को दोपहर में शहर के शहजादपुर, मुरादाबाद व किछौछा दरगाह की मस्जिदों में नमाज से पहले खतीबों ने तकरीर का आयोजन किया गया।
रोजे की अहमियत को बयान करते हुए कहा कि रोजा रखने से हमारी सहन शक्ति और आत्मशक्ति बढ़ती है। हम इच्छाओं पर काबू भी रखते हैं। अपने भीतर की बुराइयों को भी हमें त्यागना चाहिए और खुदा के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। वहीं दरगाह किछौछा में बड़ी संख्या में आए हुए जायरीनों समेत स्थानीय लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। मस्जिदें नमाजियों से पूरी तरह से भरी रहीं। जुमे की नमाज अदा कर अकीदतमंदों ने मुल्क व समाज की तरक्की के लिए दुआएं मांगी। छोटे-छोटे बच्चे भी जुमे का रोजा रखकर मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए पहुंचे।
विज्ञापन



बॉक्स
जमकर हो रही खरीदारी
फोटो- 20
रमजान के पाक महीने में रोजेदार गुनाह-ए-सगीरा से तौबा का संकल्प ले रहें हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग जहां स्वयं रोजा रख रहें हैं, वहीं छोटे बच्चों को भी प्रेरित कर रहे हैं। मस्जिदों में अव्वल वक्त नमाज अदा कर अल्लाह की खुशनूदी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। मस्जिद के अलावा घरों में कुरान की आयतें गूंज रही हैं। जलालपुर कस्बे के वाजिदपुर उर्दू बाजार, नीमतल समेत अन्य स्थानों पर सभी मस्जिदों में तरावीह पढ़ी जा रही है। बड़ी संख्या में लोग सहरी और इफ्तारी के लिए फलों और सामानों की खरीदारी कर रहे हैं।
-
सिर्फ भूखे-प्यासे रहना ही रोजा नहीं
फोटो- 21
फाजिल ए बगदाद अल्लामा सैयद हसन अस्करी ने बताया कि सिर्फ भूखे-प्यासे रहना ही रोजा नहीं है। सच्चा रोजा वह है जिसमें इंसान हर बुराई से दूर रहे। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील कि इस पवित्र महीने में रोजा रखने के साथ नमाज की पाबंदी करें। कुरआन पाक की तिलावत करें। यह अवसर साल में एक बार मिलता है, इसलिए इस बरकत और रहमत के महीने में गरीब परेशान लोगो की ज्यादा से ज्यादा मदद कर पूरा लाभ उठाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें