अंबेडकरनगर। दुष्कर्मी को अपर जनपद न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने शुक्रवार को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अलग-अलग धाराओं में आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने का भुगतान न करने पर चार माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
मामला राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र में 13 वर्ष पहले का है। 18 मार्च 2009 को एक महिला ने दर्ज कराए केस के जरिए कहा था कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री को स्कूल जाते समय गांव का ही हौसला तथा उसके मामा ने बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया।
पुलिस ने केस दर्ज तलाश शुरू कर दी थी। कुछ दिनों बाद किशोरी पुलिस को मिल गई। आरोपी हौसला को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। किशोरी के चिकित्सीय परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर धारा बढ़ा दी गई। जेल से आरोपी को बाद में जमानत मिल गई।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि अब सजा के लिए सुनवाई होने पर कोर्ट में दलील दी गई कि किशोरी का जबरन शादी के लिए अपहरण किया गया। उसके साथ दुष्कर्म का जघन्यतम अपराध किया गया है।
उधर बचाव पक्ष की तरफ से तर्क दिया गया कि वह पहले ही ढाई वर्ष तक जेल में रह चुका है। उसे एक छोटा बच्चा है। ऐसे में न्यूनतम दंड दिया जाए।
सुनवाई करते हुए एडीजे अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने नाबालिग से दुष्कर्म में सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। कई अपराध में कुल बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा सुनवाई के दौरान मौजूद आरोपी हौसिला को कोर्ट मोहर्रिर विभांशु सिंह ने फैसला आने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।