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Ambedkar Nagar News: चकबंदी विभाग के फैसले ने रखी गोली कांड की नींव

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अंबेडकरनगर। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के माझा कम्हरिया गांव में हुए खूनी संघर्ष ने चकबंदी विभाग के एक फैसले को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। दरअसल दो पक्षों में चल रहे विवाद के बीच विभाग ने अराजी देवारा गांव में बैनामे की एक भूमि में इंद्रासन पक्ष के लोगों को सह खातेदार बना दिया। सोमई पक्ष के अनुसार इसके लिए न तो कोई नोटिस दी गई और न जवाब दाखिल करने का मौका।
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नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस फैसले का हवाला देते हुए माझा कम्हरिया की भूमि पर भी हक जताया जाने लगा। इसी के बाद भूमि की जुताई के विवाद ने एक बुजुर्ग की जान ले ली, जबकि कई अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
माझा कम्हरिया गांव में सवा तीन बीघा भूमि पर कब्जे को लेकर हुए विवाद की शुरूआत बीते दिनों अराजी देवारा गांव के एक भूखंड से हुई। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के ही इंदौरपुर घिनहापुर निवासी सोमई यादव व इंद्रासन यादव के बीच भूमि पर कब्जे को लेकर विवाद चला आ रहा है। इसने लगभग दो माह पूर्व तब तूल पकड़ लिया, जब सोमई के पिता वंशू के नाम अराजी देवारा स्थित भूखंड में इंद्रासन यादव पक्ष को भी सह खातेदार बना दिया गया।
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सोमई के भतीजे अर्जुन बताते हैं कि अराजी देवारा में पैतृक भूमि के अलावा करीब चार बीघा भूमि का उन सब ने बैनामा लिया था। नियमानुसार खरीदी गई भूमि में किसी बाहरी को सह खातेदार नहीं बनाया जा सकता। इसके बावजूद चकबंदी विभाग ने मिलीभगत कर इंद्रासन पक्ष के लोगों को सह खातेदार बना दिया। इसकी जानकारी हुई तो वे सब सन्न रह गए।
अधिवक्ता के जरिए चकबंदी अधिकारी के समक्ष आदेश को वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर सुनवाई होनी है। इस बीच आराजी देवारा में सह खातेदार बनते ही इंद्रासन पक्ष के लोगों की निगाह माझा कम्हरिया स्थित भूमि पर टिक गई।
इस पैतृक भूखंड पर भी इंद्रासन पक्ष ने अपना हक जताना शुरू कर दिया। दो बार कब्जे की कोशिश हुई लेकिन सफल नहीं हो पाई थी। अन्तत: रविवार देर शाम गोलबंद होकर कब्जे की तैयारी में भूमि की जुताई की गई। जिसका विरोध करने पर सोमई पक्ष के रामदरस की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि छह अन्य घायल हो गए।
अर्जुन बताते हैं कि उनके बाबा स्व वंशू के पांच पुत्र त्रिभुवन, रामवचन, फूलचंद्र, लक्ष्मण व सोमई हैं। इनके नाम ही पैतृक संपत्ति है। इसके अलावा अनावश्यक ढंग से कुछ लोग अपना दावा जता रहे हैं।
बीते दिनों इसमें चकबंदी अधिकारियों ने भी विपक्षियों का साथ दे दिया। अराजी देवारा के भूखंड में नियमों को ताक पर रखकर विपक्षियों का नाम चकबंदी के बहाने जोड़ दिया गया। इस प्रक्रिया में न तो कोई नोटिस दी गई और न ही हम लोगों का कोई पक्ष सुना गया। साजिश रचकर ही इस मामले में विपक्षियों को सह खातेदार बनाया गया है। जिला प्रशासन को इस पूरे प्रकरण की विधिवत जांच करानी चाहिए।
सह खातेदार बनाए जाने के मामले में चकबंदी अधिकारियों के समक्ष पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि बैनामे की भूमि में किसी भी बाहरी को सह खातेदार नहीं बनाया जा सकता।
बैनामे मे जिसका नाम दर्ज है, उसी के नाम भूमि होगी। इसके बावजूद गलत ढंग से अराजी देवारा के भूखंड में कुछ बाहरी लोगों को सह खातेदार बना दिया गया। जाहिर तौर पर इससे उनका मनोबल बढ़ गया और वे सब दूसरे भूखंडों पर भी कब्जे की कोशिश करने लगे।
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