अंबेडकरनगर। नाम बड़े और दर्शन छोटे। यह कहावत राजकीय मेडिकल कॉलेज सदरपुर पर सही साबित हो रही है। पांच वर्ष पहले जन औषधि केंद्र की स्थापना तो की गई लेकिन उसका संचालन अब तक नहीं हुआ। चिकित्सक व टेक्नीशियन की तैनाती न होने से तीन वर्ष से एमआरआई मशीन शोपीस साबित हो रही है। परिसर में चारों तरफ गंदगी है तो शौचालय की स्थिति अत्यंत बदतर है। पेयजल व प्रकाश व्यवस्था बेपटरी है तो वार्ड में भर्ती मरीजों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज सदरपुर में मरीजों व तीमारदारों को बेहतर सुविधा प्रदान करने को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। एक तरफ संचारी रोगों पर अंकुश पाने के लिए स्वच्छता अभियान तो चलाया जा रहा लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्वच्छता अभियान का कोई असर नहीं है। मुख्य गेट से लेकर भवन के अंदर तक जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। सीढ़ियों के नीचे पान की पीक से दीवार लाल हो गई है।
मालूम हो कि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन औसतन 1400 ओपीडी होती है। इसके बाद भी मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। कॉलेज में 14 वार्ड हैं लेकिन लगभग सभी वार्ड में लगे आधे से अधिक पंखे खराब हैं। प्रकाश की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां लगभग 80 शौचालय हैं लेकिन पांच दर्जन से अधिक शौचालय ऐसे हैं जो देखरेख के अभाव में पूरी तरह से निष्प्रयोज्य हैं। किसी के दरवाजे टूटे हैं तो कई प्रयोग करने लायक ही नहीं है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
शोपीस है एमआरआई मशीन
तीन वर्ष पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच के लिए मशीन आई थी। अब तक न तो चिकित्सक और न ही टेक्नीशियन की ही तैनाती हो सकी है। ऐसे में एमआरआई मशीन महज शोपीस बनकर रह गई है। यह जांच न होने से मरीजों को लखनऊ व अन्य बड़े शहरों तक की दौड़ लगानी पड़ती है। इसी प्रकार पांच वर्ष पहले जन औषधि केंद्र की स्थापना तो हुई थी लेकिन अब तक इसका संचालन नहीं हो सका। और तो और चार लिफ्ट तो लगी हैं लेकिन सभी खराब हैं। इससे मरीजों व तीमारदारों को ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बेपटरी है पेयजल व प्रकाश व्यवस्था
हिथुरी निवासी दिनेश कुमार ने कहा कि कहने को राजकीय मेडिकल कॉलेज है लेकिन मरीजों के लिए बेहतर व्यवस्था ही नहीं है। परिसर में जगह-जगह गंदगी फैली हुई है तो पेयजल व प्रकाश की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी में जब पंखे व कूलर की जरूरत है तो यहां इसे लेकर पूरी तरह से लापरवाही फैली हुई है।
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भीषण गर्मी में हो रही मुश्किलें
मालीपुर निवासी अनिल चौहान ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की सुध जिम्मेदारों को नहीं है। समुचित साफ-सफाई न होने से शौचालय पूरी तरह से निष्प्रयोज्य हैं तो वार्ड में आधे से अधिक पंखे खराब हैं। ऐसे में भीषण गर्मी में मरीजों को मुश्किलें हो रही हैं। शिकायत तो हुई लेकिन कोई सुध नहीं ली जा रही।
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दुरुस्त कराई जाएंगी व्यवस्थाएं
सीएमएस का कार्यभार संभाले हुए दो दिन ही हुए हैं। पेयजल, प्रकाश व साफ सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा। एमआरआई जांच के लिए चिकित्सक व टेक्नीशियन की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. मुकुल सक्सेना, सीएमएस राजकीय मेडिकल कॉलेज