जिले में शुद्ध पेयजल का संकट दूर करने की फिक्र जलनिगम प्रशासन को नहीं। कुल 32 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप के सापेक्ष 1198 हैंडपंप रिबोर की बाट जो रहे हैं, जबकि 827 हैंडपंपों को मरम्मत की जरूरत है। प्रशासन इसको लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चालू वित्तीय वर्ष में मात्र 450 इंडिया मार्का हैंडपंपों को रिबोर करने का लक्ष्य दिया गया है। तीन माह से अधिक का समय बीत गया है, पर अब तक 110 हैंडपंपों को ही रिबोर किया जा सका है।
भीटी तहसील क्षेत्र व अकबरपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों को क्रिटिकल जोन घोषित किया जा चुका है। इन सबके बावजूद आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हो पा रहे हैं। इस सबके बावजूद विभागीय अधिकारी खराब पड़े हैंडपंपों को ठीक कराने या फिर रिबोर कराने को लेकर गंभीर नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 32 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें से 1 हजार 198 हैंडपंप मौजूदा समय में रिबोर कराए जाने की अवस्था में हैं, जबकि 827 की मरम्मत की जरूरत है। हालांकि खराब पड़े हैंडपंपों की संख्या इससे कहीं अधिक है। चालू वित्तीय वर्ष में शासन से जिले को 1308 के सापेक्ष मात्र 450 हैंडपंप के ही रिबोर कराए जाने का लक्ष्य दिया गया है। जल निगम के अधिशासी अभियंता अनिल चंद्रा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जितने हैंडपंप का रिबोर कराने का लक्ष्य दिया गया है, उसके सापेक्ष कार्य तेजी से चल रहा है। जून माह के अंत तक कुल 110 हैंडपंपों को रिबोर किया जा चुका है। कहा कि जिन हैंडपंपों की मरम्मत की जानी है, वह ग्राम पंचायत स्तर पर ठीक कराया जाएगा। इसके लिए निर्देश दिए जा चुके हैं।