जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। मौजूदा समय में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 28 हजार 220 है, जबकि कुपोषित बच्चों की संख्या इसके दोगुने से भी अधिक 59 हजार 171 है। खास बात यह कि इन बच्चों को चिह्नित करने के बाद भी विभाग इन्हें शत प्रतिशत कुपोषण से मुक्त नहीं कर पा रहा है।
शासन के निर्देेेश पर कुपोषण मुक्त करने के लिए गोद लिए गए 82 गांवों के बच्चों की भी दशा नहीं सुधर पा रही है। इससे योजना के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान भी उठने लगे हैं। बच्चों व गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से मुक्त करने के लिए प्रदेश सरकार नेे पूर्व में राज्य हौसला पोषण मिशन योजना की शुरुआत की थी।
इस योजना का उद्देश्य जिले को कुपोषण मुक्त करना है। योजना के तहत बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव गांव जाकर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की जांच करते हैं। उम्र व लंबाई के अनुपात में वजन न होने या फिर किसी बीमारी के शिकार बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे उनके शरीर का समुचित विकास सुनिश्चित हो सके।
व्यापक पैमाने पर संचालित की गई इस योजना के तहत जिला स्तरीय 43 अधिकारियों द्वारा 2-2 गांव गोद लिया गया था। इसके बाद भी स्थिति सुधर नहीं पा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मार्च माह में 2 लाख 97 हजार 364 बच्चों के सापेक्ष 2 लाख 86 हजार 132 बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। इसमें से 28 हजार 220 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में पाए गए हैं।
इसके अलावा 59 हजार 171 बच्चे कुपोषित मिले हैं। रोशनगढ़ के कुलदीप वर्मा, रामअवतार व गोविन्द गनेशपुर के पप्पू तिवारी व अजय सिंह का कहना है कि शुरुआती दौर में योजना संचालित होती दिख रही थी। बीच बीच में अधिकारी भी गांव पहुंच रहे थे। हालांकि पिछले कई माह से योजना गांव में लगभग ठप सी पड़ी है।
इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया राज्य हौसला पोषण मिशन योजना के तहत प्रत्येक माह टीम गांवों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर रही है। अतिकुपोषित बच्चों की स्थिति में 74 प्रतिशत सुधार हुआ है।