जिले के बैंकों में उत्पन्न हुए धन संकट से शुक्रवार को भी उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पैसा निकालने की आस में एक एटीएम के चक्कर काटते रहे। सफलता न मिलने पर पासबुक लिए बैंक शाखा का रुख किया तो वहां भी मायूसी ही हाथ लगी।
कहीं घंटों लाइन में लगने के बाद एटीएम में पैसा खत्म हो गया तो कहीं अन्य समस्याओं से धन नहीं मिल पाया। जिले में शायद यह पहला मौका है कि पिछले चार दिन से तमाम बैंक शाखाओं में धन का टोटा पड़ा हुआ है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले कभी-कभार सुनाई पड़ता था कि ग्रामीण क्षेत्र की किसी शाखा में धनाभाव के चलते भुगतान नहीं हो रहा है। इस बार तो जिले की लगभग 50 बैंक शाखाओं ने धन निकासी से हाथ खड़ा कर दिया है।
बीते चार दिनों से जिले में जिस तरह से धन निकासी के लिए उपभोक्ताओं के बीच अफरा-तफरी देखी जा रही है, उससे बैंक प्रबंधन द्वारा उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने के सारे दावे तार-तार हो गए हैं। उपभोक्ता बैंकों में अपना पैसा जमा कर अब उसकी निकासी के लिए भटक रहे हैं।
वक्त पर पैसा न निकल पाने से उनको कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को बैंकों में अवकाश होने के चलते एटीएम सुविधाएं भी बेहाल थीं। उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि शायद शुक्रवार को बैंक शाखाएं खुलें तो एटीएम पर लोड कम हो जाए और उन्हें धन निकासी में आसानी हो।
हालांकि स्थिति ठीक इसके उलट दिखी। शुक्रवार को भी पूरे दिन उपभोक्ता हाथों में डेबिट कार्ड लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम बूथ तक का चक्कर काटते दिखे। बैंक शाखाओं में भी धननिकासी के लिए काफी आपाधापी दिखी।
धनाभाव के चलते धन निकासी सुचारु रूप से नहीं हो सकी। अन्य उपभोक्ता जो रकम जमा कर रहे थे, उसी रकम का भुगतान निकासी को आए उपभोक्ताओं को किया जा सका।
उपभोक्ता शिवबहादुर व महेंद्र मिश्र का कहना है कि ये अव्यवस्थाएं बैंक प्रबंधन की लापरवाही के चलते हुई हैं। स्थिति यह है कि उपभोक्ता अपना ही पैसा वक्त पर नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे कई मुश्किलों का सामना पड़ रहा है।