योजना को लेकर लगभग एक पखवारे से तमाम प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन इसके बाद भी यहां अधिकांश स्कूलों में बच्चों को पहले दिन दूध नहीं मिल पाया।
जिन स्कूलों में बुधवार को दूध का वितरण नहीं हुआ, उन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने यह कहने में कोई संकोच महसूस नहीं किया कि उन्हें विभाग द्वारा इसकी जानकारी ही नहीं दी गई थी। कुछ प्रधानाचार्यों को तो समाचार पत्रों के माध्यम से सूचना थी, लेकिन आवश्यक प्रबंध कहां से होगा इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
योजना के तहत भोजन के साथ ही प्रति छात्र 200 मिली लीटर दूध दिया जाना है। उधर जिन चंद विद्यालयों में योजना का श्रीगणेश भी हुआ, तो वहां आमतौर पर सिर्फ फर्ज अदायगी ही निभाई गई।
ऐसे कई विद्यालय दिखे, जहां 80 से 100 एमएल तक ही दूध दिया गया। दूध में पानी की मात्रा भी ज्यादा दिखाई पड़ रही थी। अभिभावकों ने कहा कि शुरुआती दौर में ही योजना का यह हाल है तो आगे इसके हश्र का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।
बोले अधिकारी
बीएसए डॉ राजबहादुर मौर्य ने बताया कि दूध वितरण के निर्देश सभी विद्यालयों को दिए गए हैं। पहला दिन होने की वजह से कुछ जगह ही वितरण न हो पाने की सूचना है। एक दो दिन में सबकुछ सामान्य कर लिया जाएगा।