उड़द, चावल व तिल आदि सामाग्रियों का दान भी किया गया। जिला मुख्यालय पर मकर संक्रांति पर्व को लेकर श्रद्घालुओं में खासा उल्लास दिखा। शुक्रवार प्रात: स्नान के बाद घरों व मंदिरों में विधि विधान से पूजन अर्चन हुआ, और इसके बाद पुरोहितों को दान दिया गया।
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के तामेश्वरनाथ महादेव डुहिया, हनुमानगढ़ी, राजघाट सहित अन्य स्नानघाटों पर सुबह से ही श्रद्घालु पहुंचते रहे। हर हर गंगे व हर हर महादेव के बजघोष के साथ लोगों ने पूरी श्रद्घा से पवित्र सरयू की जलधारा में स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा किया।
साथ ही चावल और उड़द की दाल मिश्रित खिचड़ी व तिल आदि का दान दिया। लोगों ने मंदिरों में स्थापित विग्रह का दर्शन करके पूजन अर्चन कर सुख समृद्घि की कामना किया।
मकर संक्रांति पर्व का महत्व बताते हुए पंडित वेदप्रकाश उपाध्याय ने श्रद्घालुओं को बताया कि भगवान सूर्य की स्थिति के आधार पर पूरा वर्ष उत्तरायण व दक्षिणायन दो बराबर भागों में बटा होता है।
बताया कि संक्रांति शब्द का अर्थ है कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना। भगवान सूर्य जब राशि को छोड़कर दूसरे राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति पर्व पर भगवान सूर्य की उपासना, तीर्थ स्थलों पर स्नान दान आदि का विशेष महत्व है।