आलापुर(अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के हुसेनपुर खुर्द में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के छठवें दिन शनिवार को विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। प्रवाचक स्वामी शुभम ने कहा कि धर्म और कर्तव्य में संतुलन बनाए रखना ही स्थायी शांति का आधार है। भक्ति तभी सार्थक है, जब वह व्यवहार और आचरण में दिखाई दे।
परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना आध्यात्मिक जीवन का हिस्सा है। मानसिक शांति के लिए संयम, सत्य और सेवा को जीवन में अपनाना आवश्यक है। कथा के दौरान यह बताया गया कि देवी भागवत मानव जीवन को मर्यादा, कर्तव्य और संतुलन का मार्ग दिखाने वाला ग्रंथ है। सृष्टि का संचालन शक्ति के बिना संभव नहीं है और यही शक्ति विभिन्न रूपों में संसार का संरक्षण करती है। जब भी समाज में अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए शक्ति सक्रिय होती है। इस दौरान पारिवारिक जीवन, सामाजिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत आचरण से जुड़े उदाहरण प्रस्तुत किए गए। बताया गया कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है( बच्चों में संस्कार, परिवार में संवाद और समाज में सहयोग की भावना को जीवन का आधार बताया गया।