छठ पर्व के दूसरे दिन भी महिलाओं ने व्रत रखा। पुत्रों की दीर्घायु के लिए रखे जाने वाले इस पर्व का समापन सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। रविवार को रखे जाने वाले मुख्य व्रत की तैयारियां महिलाओं ने लगभग पूरी कर ली हैं। शनिवार को भी बाजारों में महिलाओं ने आवश्यक सामान की जमकर खरीदारी की। गौरतलब है कि जिले में भी छठ पर्व का उल्लास बढ़ने लगा है।
लगभग आधा दशक से इस पर्व को लेकर महिलाएं और ज्यादा उत्सुक दिखने लगी हैं। इस बार भी यह चार दिनी पर्व शुक्रवार को नहाय खाय की परंपरा के साथ शुरू हुआ। पहले दिन महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखा और शाम को लौकी की सब्जी व रोटी के साथ व्रत का पारण किया। पर्व के दूसरे दिन शनिवार को भी महिलाएं निर्जला व्रत रहीं।
पुत्र की दीर्घायु व उनकी तरक्की के लिए महिलाओं ने दिन भर व्रत रखा और सायंकाल विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया। कृष्णानगर निवासिनी श्रद्धा तिवारी ने बताया कि वे लंबे समय से यह व्रत रखती आ रही हैं। इस बार भी पूरी तैयारी के साथ छठ पर्व मना रही हैं। बताया कि रविवार को भी व्रत रखने के बाद शाम को सूर्य के डूबने से पहले उन्हें अर्घ्य दिया जाएगा।
इसके लिए महिलाएं समूह में नदी या पोखरे के तट पर पहुंचेंगी। इसके बाद पूजा-अर्चना करेंगी। शास्त्रीनगर की कौशिल्या सिंह ने बताया कि पूर्वांचल के बाद अब इधर भी छठ पर्व की महत्ता बढ़ती जा रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं इस व्रत को रखती हैं और अपने पुत्रों की सलामती के लिए भगवान सूर्य की आराधना करती हैं। वह भी यह व्रत सात वर्षों से रखती आ रही हैं।
व्रत को पूरे विधि-विधान से करने पर फल की प्राप्त भी होती है। कई अन्य महिलाओं ने भी व्रत को लेकर अपनी आस्था जाहिर की। इस बीच रविवार को होने वाले मुख्य व्रत को लेकर महिलाओं ने शनिवार को बाजारों में जरूरी सामान की जमकर खरीदारी की। कपड़े व शृंगार के साधनों के अलावा फल व गंजी आदि की भी खूब खरीदारी की गई। इससे शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के दुकानदारों के चेहरे भी खिले रहे।
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार महापर्व को लेकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है। बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी जोरों पर है। नगर में छठ पर्व को लेकर व्रत धारण करने वाली महिलाओं में उत्साह का माहौल है। मुख्य उपासना रविवार शाम और सोमवार सुबह होगी। रविवार को महिलाएं निर्जला व्रत धारण कर पवित्र सरयू नदी के तट पर अस्ताचलगामी सूर्य देव को नमन कर अर्घ्य देंगी।
रविवार को ढोल-ताशे के साथ डाला में पूजन सामग्री रखकर अपने परिवारीजनों को साथ में लेकर नगर के प्रसिद्ध श्रीहनुमान गढ़ी घाट पहुंचेंगी और पवित्र सरयू की जलधारा में खड़ी होकर भगवान सूर्य की उपासना करेंगी। सोमवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी पूरी कर ली गई है।