अंबेडकरनगर। महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज को बने हुए 13 वर्ष से ज्यादा हो चुका है इसके बावजूद आज भी कैंसर के इलाज के लिए जिले के मरीजों को राजधानी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
यहां केवल ओरल, स्तन और सर्वाइकल कैंसर की ही जांच होती है। स्क्रीनिंग से संदिग्ध रोगियों की पहचान कर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में आंकोलॉजी विभाग न होने की वजह से कैंसर के रोगियों को उच्च संस्थानों का रुख करना पड़ता है।
बात अगर पिछले एक साल की करें तो मेडिकल कॉलेज में साइटोपैथाेलॉजी जांच से 43 व हिस्टोपैथाेलॉजी से 39 मरीज कैंसर से पीड़ित मिले। इस साल बोनमैरो में दो मरीजों में ब्लड कैंसर की भी पुष्टि हुई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराई गई स्क्रीनिंग में अब तक 793 कैंसर के संदिग्ध रोगी मिल चुके हैं।
मेडिकल कॉलेज में है प्राइमरी व बायोप्सी जांच की सुविधा :
सीएमओ डॉ. राजकुमार बताते हैं कि जिला अस्पताल समेत सीएचसी, पीएचसी व अन्य केंद्रों पर दो प्रकार के कैंसर की स्क्रीनिंग की सुविधा दी जा रही है। इनमें ओरल व ब्रेस्ट कैंसर शामिल हैं। सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की सुविधा दी जानी है लेकिन अभी संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण नहीं दिया जा सका है। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में कैंसर की प्राइमरी जांच के लिए साइटोपैथाेलॉजी व बायोप्सी के लिए हिस्टोपैथाेलॉजी कराई जाती है। कैंसर की श्रेणी का पता लगाने के लिए होने वाली जांच इम्युनो हिस्टोकेमिस्ट्री की सुविधा अभी यहां नहीं है।