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Ambedkar Nagar News: इंसानों ही नहीं पशुओं के इलाज के नाम पर भी लूट

Sat, 04 May 2024 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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जिला प्रशासन की जांच में गड़बड़ी की हुई पुष्टि,
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अमर उजाला ने एक दिन पहले छापा था 108 व 102 एंबुलेंस सेवा के नाम पर धांधली
अंबेडकरनगर। सिर्फ इंसानों के नाम पर ही नहीं जानवरों के इलाज के नाम पर भी बड़ी लूट का खुलासा हुआ है। अमर उजाला द्वारा तीन मई को 108 व 102 एंबुलेंस सेवा में गड़बड़ी को लेकर खबर प्रकाशन को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया। जांच कराई तो यह बड़ा खुलासा हुआ कि इसी कंपनी द्वारा पशुओं के इलाज के लिए घर घर जाने के लिए चलाई जा रही 1962 एंबुलेंस सेवा के नाम पर भी धांधली बरती जा रही। जिला प्रशासन ने अब जांच का शिकंजा कस दिया है। संबंधित कंपनी को यहां ब्लैक लिस्टेड करने से लेकर केस दर्ज कराने तक की कार्रवाई सामने आ सकती है।
फर्जी कॉल करवाकर बगैर मरीज के ही सड़क पर एंबुलेंस दौड़ाने को लेकर धांधली बरते जाने का खुलासा अमर उजाला ने तीन मई के अंक में किया था। इसमें यह बात निकलकर सामने आई थी कि स्वास्थ्य विभाग ने अंदरूनी जांच में गड़बड़ी पकड़ी है। अमर उजाला ने इस गड़बड़ी को सार्वजनिक किया तो डीएम अविनाश सिंह ने फौरन इस मामले में भी पूरी पत्रावली तलब कर ली।
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इससे पहले जलालपुर नगर पालिका में दो करोड़ का टेंडर रात के अंधेरे में खोल दिए जाने को लेकर अमर उजाला की खबर का भी संज्ञान लेते हुए डीएम ने न सिर्फ जांच कराई वरन अत्यंत सख्ती बरतते हुए टेंडर निरस्त कर दिया और विधिक कार्रवाई के भी निर्देश दिए।
इधर डीएम अविनाश सिंह ने शुक्रवार को ही 102 व 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों व अधिकारियों को तलब कर जांच शुरू कराई तो एक और धांधली का पर्दाफाश हो गया। जो कार्यदायी संस्था मरीजों को ढोने वाली एंबुलेंस का संचालन कर रही है, वह जिला प्रशासन को यह ठीक से नहीं बता पाई कि पिछले एक वर्ष में 1962 सेवा के जरिए गांव गांव पहुंचकर कितने पशुओं का उपचार हुआ। इससे पूरे मामले में जांच का दायरा प्रशासन ने बढ़ा दिया है। (संवाद)



जीवीके कर रही दोनों योजनाओं का संचालन
जिले में निजी कार्यदायी संस्था जीवीके ही पशुओं व मरीजों को अस्पतालों तक ले जाने व इलाज का जिम्मा संभाल रही है। जिला प्रशासन द्वारा शुरू कराई गई जांच में यह तथ्य सामने आ गया कि आशा बहुओं के नाम से फर्जी कॉल कराकर एंबुलेंस के फेरे लगाने का कोटा बिना मरीज के ही पूरा कर लिया जाता है। 30 चक्कर प्रतिदिन प्रति एंबुलेंस लगाने की अनिवार्यता के बीच एंबुलेंस सेवा से जुड़े कई कर्मचारियों ने यह लिखित बयान दे दिया है कि उनके द्वारा फर्जी कॉल कराकर फेरा लगाया जाता रहा है। सीएमओ डॉ. राजकुमार, अपर सीएमओ डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. मारकंडेय, डिप्टी डीआईओ डॉ. गौतम मिश्र ने अपनी जांच में इन गड़बड़ियों को पकड़कर डीएम के सामने रखा ।
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उधर जांच में यह पता चला कि यही कंपनी पशुओं के भी इलाज का जिम्मा संभाल रही है तो उससे पशुओं के इलाज से जुड़ी जानकारी तलब कर ली गई। इसके नाम पर भी इस तरह से लूट के संकेत मिले कि अधिकारियों के सामने यह बताया ही नहीं जा सका कि कितने पशुओं का कुल इलाज एक वर्ष में किया गया। ऐसे में पशुओं के इलाज के नाम पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने जा रहा है। जिला प्रशासन दोनों मामलों में कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है।
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