फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पट्टाधारकों को ओटीपी नहीं, अवैध तरीके से हो रहा बालू खनन

विज्ञापन
अंबेडकरनगर के फरीदपुर तप्पा में अवैध तरीके से हो रहा बालू का खनन। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। खनन विभाग की उदासीनता के चलते सरयू नदी में बालू खनन के माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। पट्टाधारक एक तरफ ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अवैध खनन माफिया धड़ल्ले से बड़ी बड़ी मशीनों के साथ नदी में खनन का कार्य शुरु कर दिए हैं।
विज्ञापन

ऐसा नहीं है कि विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। इसके चलते ही दिन हो या रात नदी में बालू की अवैध खनन धड़ल्ले से हो रही है। ऐसे में न सिर्फ इसका नुकसान सिर्फ पट्टाधारकों को हो रहा है, बल्कि सरकार को भी रोजाना लाखों रुपए के राजस्व की क्षति हो रही है। इसके बावजूद खनन विभाग व प्रशासन पूरी तरह मौन है।
सरयू नदी में बालू का खनन कार्य एक अक्तूबर से जून 30 के बीच होता है। बालू खनन में होने वाली मनमानी को रोकने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। इसके चलते ही न सिर्फ घाटों पर धर्मकांटे के साथ ही सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश है, जिससे ऑनलाइन घाटों की निगरानी प्रदेश मुख्यालय से किया जा सके।
विज्ञापन

इस बार नई प्रक्रिया के तहत खनन होने के चलते अक्तूबर से खनन का कार्य अभी शुरू नहीं हुआ।
पट्टा आवंटन तो हो चुका है, लेकिन पट्टाधारकों को ओटीपी यानि ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट अनुमति नहीं मिली है। इसके चलते वैध पट्टाधारक खनन का कार्य नहीं शुरू नहीं कर पा रहे हैं। विभाग की इसी लापरवाही एवं मनमानी का फायदा अवैध खनन माफिया उठा रहे हैं। पट्टाधारक ओटीपी लेने के लिए कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं, जबकि स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार खनन माफिया धड़ल्ले से टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के सरयू नदी में विभिन्न घाटों पर मशीनों से अवैध तरीके से बालू का खनन कर रहे हैं।
रविवार को ‘अमर उजाला’ टीम आलापुर तहसील क्षेत्र के फरीदपुर तप्पा घाट पहुंची, तो यहां खनन माफियाओं का चल रहा बोलबाला साफ दिखा। घाट पर एक जगह जेसीबी मशीन चलती दिखायी पड़ी तो दूसरी तरफ नदी में नाव के सहारे लिफ्टर मशीन नदी में चल रही थी। यह मशीन नदी के अंदर तह तक जाकर बालू की आसानी से खुदाई कर सकती है, और उसे आसानी से किनारे पाइप के जरिए पहुंचाती है।
एक पट्टाधारक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभागीय मिलीभगत के चलते यह सब हो रहा है। पट्टाधारकों को ओटीपी न मिलने की वजह से खनन नहीं कर दिया जा रहा है। दूसरी तरफ कुछ लोग अधिकारियों से साठगांठ कर पूर्व में हुए डंप के रवन्ने (परमिट) की आड़ में नदी से बालू की खनन कर रहे हैं। शिकायत भी दर्ज करायी गई, लेकिन खनन पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है।
प्रतिदिन हो रहा ढाई लाख का नुकसान
विभागीय उदासीनता के चलते अवैध बालू खनन से प्रतिदिन सरकार को करीब ढाई लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। सूत्रों की मानें तो अलग अलग घाटों से रोजाना 50 गाड़ी बालू लदती है। यदि खनन वैध ढंग से चलता तो सरकार को प्रति गाड़ी करीब पांच हजार रुपए की रॉयल्टी जमा होती। परंतु विभागीय लापरवाही के चलते प्रतिदिन सरकार को यह क्षति हो रही है।
दूसरी तरफ पट्टा लेने वाले धारकों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पट्टाधारकों का कहना है कि एक अक्तूबर से 30 जून तक खनन का कार्य चलता है। परन्तु इस बार निर्धारित समय से खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में अब खनन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा।
जिला खनन अधिकाररी पीके यादव ने बताया जिले में किसी भी घाट पर अवैध बालू खनन की शिकायत नही है। फिलहाल पट्टाधारकों के खनन के लिए ऑनलाइन की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही वर्गीनिजामपुर, रायपुर, इसौरी नसीरपुर व फरीदपुर तप्पा में खनन कार्य शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें